रविवार, 7 जून 2015

रामदीन की किफायती खरीदारी

रामदीन एक छोटे से गांव में गरीब घर में पैदा हुआ। गांव में कोई स्कूल,अस्पताल नहीं था। गांव को शहर से जोड़ने वाली कोई सड़क भी न थी। गांव में बिजली भी नहीं थी। गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित था। गांव से दो कोस दूरी पर एक दूसरे गांव में मिडिल स्कूल था। वहीं से रामदीन ने मिडिल स्कूल पास किया। मिडिल स्कूल के बाद हाई स्कूल में जाने के लिए चार कोस पैदल चलकर जाना पड़ता  था। उस समय रामदीन के गांव से कोई भी आदमी शहर में सरकारी नौकरी नहीं करता था।  रामदीन का सपना था कि वह पढ़लिख कर शहर में नौकरी करे। इसी सपने के साथ रामदीन ने भी उस हाई स्कूल में प्रवेश ले लिया था। उसके गांव से उस समय हाई स्कूल जाने वाले मात्र चार लड़के और थे। सभी पैदल ही स्कूल जाते थे। लड़कियां तब इक्का-दुक्का ही पढ़ती थी और मिडिल पास या फेल होने के बाद उनकी पढ़ाई बंद हो जाती थी। रामदीन पढ़ने में अच्छा था। वह स्कूल में मैट्रीक की परीक्षा में अपने स्कूल में अव्वल रहा। आज भी उस स्कूल के मैट्रीक में प्रथम आने वालों के बोर्ड पर उसका नाम लिखा हुआ है-- रामदीन वलद गोपी राम। इसी कारण उसे आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए सरकार की ओर से वजीफा दिया गया। 

मैट्रीक के बाद हायर-सेकंडरी के लिए गांव से शहर जाना होता था। शहर गांव से सात कोस दूरी पर था। रामदीन ने किसी तरह एक पुरानी साईकिल खरीदी। उसी पर वह शहर पढ़ने जाने लगा। रास्ता आधा कच्चा आधा पक्का था। बीच में एक बरसाती नदी भी पड़ती थी। जिससे बरसात के दिनों में साइकिल हाथों में उठाकर नदी को पार करना पड़ता  और जब बारीस नहीं होती थी तो पैदल ही। पर इन सब बाधाओं के बावजूद  भी रामदीन पढ़ाई  जारी रखे हुए था।  हायर-सेकंडरी करते-करते रामदीन शहर की गलियों से परिचित हो गया था। शहर रोज आने जाने से गांव के दूसरे लोगों को भी उससे सहूलियत हुई। गांव के लोग अक्सर उसे कुछ पैसा देकर घर की जरूरत का राशन आदि मंगवाने लगे थे। वह लोगों की इस सेवा के कारण गांव में बहुत से लोगों की दुआएं पाता था।  

अब रामदीन ने कॉलेज में प्रवेश ले लिया था। शहर आना-जाना बना हुआ था। रामदीन के लिए कॉलेज का वातावरण बहुत स्वछंद था। उसकी जानपहचान ऐसे लड़कों से हुई जो बीड़ी-सिगरेट पीते थे। इस संगत से उसे भी बीड़ी पीने का शौक लगा। तभी उसे सिनेमा देखने का भी शौक चढ़ा।  इन सब नए-नए शौकों के चलते उसकी जेब खाली रहने लगी। उसके पिता से मिलने वाले पैसे नाकाफी होने लगे। इसके लिए उसने गांव वालों के दिए हुए राशन-आदि  के रुपयों पैसों को खर्च करने का एक नया ढंग इजाद किया। वह एक सामान को खरीदने के लिए दस-पंद्रह दुकानों पर चीजों के मोल पूछता। जहां कहीं उसे वह वस्तु सबसे कम दामों में मिलती, वहां से वह मौल भाव करके उस चीज को खरीदता। इस तरह अधिकतम मूल्य से शेष बची राशि उसकी कमाई होती। जिसे वह अपने शौक पुरे करने में लगाता। 

कॉलेज की पढाई के बाद रामदीन की एक सरकारी महकमें में नौकरी लग गई। शादी हुई। बाल-बच्चे हुए। घर गृहस्थी बनी। लेकिन रामदीन की कॉलेज के दिनों की वह मौल-भाव की आदत और एक चीज की खरीदारी के लिए दस-पंद्रह दुकानों के चक्कर लगाना आज भी बनी हुई है।इस आदत से आज भी उन्हें कोई परेशानी नहीं है, लेकिन उनके बच्चे उनकी इस आदत से परेशान हो जाते हैं और उनके  साथ बाजार जाने से बचते हैं।

रविवार, 3 मई 2015

आत्मा का आनंद

आत्मा  का आनंद कर्मशीलता में है। -शैले

शनिवार, 21 मार्च 2015

सृष्टि की आयु

सृष्टि (पृथ्वी)की आयु (अवधि) चार अरब बत्तीस करोड़ वर्ष है। अब तक यह एक अरब छयानवे करोड़ आठ लाख त्रेपन हजार एक सौ चौदह वर्ष की हो चुकी है और दो अरब पैंतीस करोड़ इक्यावन लाख छयालिस हजार आठ सौ छियासी वर्ष प्रलय होने में शेष  हैं।

विक्रम संवत्सर 2072 की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ...

स्रोत::यजुर्वेद अध्याय३१,मंत्र १; ऋग्वेदअष्टक ८,अध्याय ७, मंत्र १ व ऋग्वेद अष्टक ६,अध्याय४,मंत्र २