सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

संदेश

2017 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

ब्लॉग दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं

बहुत अच्छा लग रहा है कि आज हिंदी ब्लॉग जगत में फिर से हलचल तेज़ हुई है। जिन लोगों ने भी इसके लिए प्रयास किए हैं,वे सभी प्रशंसा के पात्र हैं। ब्लॉग विचार अभिव्यक्ति का सर्वोत्तम मंच है। इसे ताज़ा बनाए रखने के लिए जरूरी है कि सभी ब्लॉगर बंधु अपने-अपने ब्लॉग पर नियमित रूप से लिखें। हर विषय पर ब्लॉग लिखा जाए और उन्हें अद्यतन रखा जाए। ब्लॉग पर लिखे, अभिव्यक्त विचारों पर स्वस्थ विचार-विमर्श के लिए जरूरी है कि सभी ब्लॉगर न केवल ब्लॉग लिखें बल्कि दूसरों के ब्लॉग पढें भी और उन पर पहले की तरह ही अपनी टिप्पणी दें। ताकि ब्लॉग लिखने वालों को लिखने का प्रोत्साहन मिलता रहे।

अधिक न लिखते हुए मैं सभी पुराने,नए ब्लॉगर्स को राष्ट्रीय ब्लॉग दिवस पर हार्दिक शुभकामनाएं प्रेषित करते हुए उन्हें बधाई देना चाहता हूं कि उन्होंने एक बार फिर ब्लॉग जगत पर विश्वास दिखाया है और मैं समझता हूं कि यह विचार-अभिव्यक्ति का सशक्त माध्यम बन कर इस वर्ष अपनी पुरानी साख को पुन:प्रतिष्ठापित  करने  में  सफल  होगा।

इन्ही शुभकामनाओं सहित


आपका



मनोज भारती

पुस्तक समीक्षा : 'खजाना' कहानी संग्रह

मनोज कुमार पांडेय की सद्यःप्रकाशित पुस्तक ‘ख़जाना’ पढ़ी। यह कहानीसंग्रह है जिसमें कुल आठ कहानियां संकलित है,जो इस रूप में प्रकाशित होने से पूर्व तद्भव,पक्षधर,रचना समय,अभिनवकदम,कादंबिनी और पल-प्रतिपल पत्रिकाओं में छप चुकी हैं। संग्रह की तीन लंबीकहानियां हैं। ये हैं-चोरी,घंटा,मोह। मोह सबसे लंबी कहानी है। अन्य अपेक्षाकृत छोटी कहानियां हैं। 'चोरी','टीस','मदीना','खजाना','कष्ट' आत्मकथात्मक शैली में लिखी गई हैं।कहानियोंकी बुनावट परम्परागत कहानी लेखन से हटकर है। लेखनमें चित्रांकन है। चित्र बनता जरूर है,पर उस चित्र कीव्याख्या सहजनहींहै। चित्रोंमें उतनी ही जटिलताहै जितनीकिआधुनिक माडर्न आर्ट में। यहसूक्ष्मअभिव्यंजना जरूर है, पर सामान्य जन-जीवन से इतर नहीं है। समय, समाज, व्यवस्था औरमान्यताएं उनकी इन कहानियों में अपनी संपूर्ण विद्रूपताओंऔर विडम्बनाओं के साथ आरेखित हुई हैं। समाज कीजोसंवेदनाएं