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भारत दुर्दशा

भारत गाँवों में बसता है । यह तथ्य आज भी उतना ही सही है जितना कि आजादी से पहले । अभी राजस्थान के कुछ गाँवों और एक दो छोटे शहरों में जाना हुआ । तो पाया कि शहरी और ग्रामीण जीवन में बहुत असमानताएँ हैं । भारत के बड़े शहरों में जन जीवन की सामान्य सुविधाएँ सरलता से उपलब्ध हैं । लेकिन गाँवों व छोटे कस्बों में जन जीवन को सामान्य सुविधाओं के लिए बड़ा श्रम करना पड़ता है । मैंने देखा कि गाँवों में पीने के पानी की समस्या आम है । खेतड़ी (ताँबे की खानों के लिए प्रसिद्ध) सिंघाना, नारनौल जैसे छोटे शहर में पानी की किल्लत है । घर के सदस्यों विशेषत: गृहणियों व बच्चों को सुबह-सुबह घर के बाहर पानी के लिए घंटों श्रम करना पड़ता है । सुबह-सुबह का यह नजारा हर घर को पनघट में बदल देता है । पानी बहुत कम समय के लिए आता है और वह भी अनियमित । छोटे बच्चे स्कूल जाने के बजाय पानी भरते नजर आते हैं । गाँवों में भी स्थिति ऐसी ही है । पानी की सप्लाई या तो बंद है या बहुत कम समय के लिए । पानी टैंकरों से मोल खरीदा जा रहा है । स्कूलों के लिए बने भवनों की हालत जर्जर है ,वहीं कुछ स्कूल खुले में भी चल रहें हैं । अध्यापकों की कमी ...