ऋग्वेद
वै दिक संहिताओं में ऋग्वेद को सबसे प्राचीन स्वीकृत किया गया है।लोकमान्य तिलक ने ऋग्वेद का रचना काल 4000 ई.पू. से 6000ई.पू. के मध्य माना है।यद्यपि अन्य इतिहासकार और विद्वान इस मत से सहमत नहीं हैं, तथापि ऋग्वेद के प्राचीनतम ग्रंथ होने से सभी एकमत हैं।कतिपय विद्वानों ने ऋग्वेद को एक स्वतंत्र ग्रंथ न स्वीकार कर इसे विशालकाय ग्रंथ समूह माना है।इन विद्वानों के अनुसार ऋग्वेद किसी एक ऋषि की रचना न होकर कई ऋषियों द्वारा विभिन्न कालों में रची गई रचना है। ऋ ग्वेद सूक्त वेद है। सूक्त का अर्थ है:उत्तम कथन।उत्तम कथन से युक्त मंत्रों के समूह को सूक्त कहते हैं।सूक्त को ऋक या ऋचा भी कहते हैं। ऋक का अर्थ है स्तुति योग्य मंत्र और वेद का अर्थ है ज्ञान।इस प्रकार ऋग्वेद का अर्थ हुआ-स्तुति योग्य मंत्रों (उक्तियों) का ज्ञान।ऋग्वेद की ऋचाओं में मुख्यत: देवताओं की स्तुतियाँ हैं।ऋषियों ने ज्ञान रूप में अपने चारों ओर जो दर्शन किया,उसे उन्होंने मंत्रबद्ध कर दिया।प्रकृति में अस्तित्व रखने वाली हर चीज उनके चिंतन का विषय रही।इसलिए देव-स्तुतियों के साथ-साथ लाभांश में सृष्टि के अनेक रहस्यों का उद्घाटन भी हो गया। ...