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सृष्टि की आयु

सृष्टि (पृथ्वी)की आयु (अवधि) चार अरब बत्तीस करोड़ वर्ष है। अब तक यह एक अरब छयानवे करोड़ आठ लाख त्रेपन हजार एक सौ चौदह वर्ष की हो चुकी है और दो अरब पैंतीस करोड़ इक्यावन लाख छयालिस हजार आठ सौ छियासी वर्ष प्रलय होने में शेष  हैं। विक्रम संवत्सर 2072 की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ... स्रोत::यजुर्वेद अध्याय३१,मंत्र १; ऋग्वेदअष्टक ८,अध्याय ७, मंत्र १ व ऋग्वेद अष्टक ६,अध्याय४,मंत्र २

सेवानिवृत्ति के पश्चात गतिविधियां- प्रतिदिन अधिकतम पाने के सूत्र

सेवानिवृत्ति के पश्चात गतिविधियां- प्रतिदिन अधिकतम पाने के सूत्र कल्पना कीजिए कि आप अलार्म घड़ी की आवाज सुन कर सुबह रात की नींद से उठते हैं और तभी आपको ख्याल आता है कि आज तो कहीं नहीं जाना है । सेवानिवृत्ति के बाद का पहला दिन जहां बहुत आश्चर्य वाला होता है वहीं यह दिन दुविधा का भी होता है। सुबह 4 बजे उठने की आदत तो अब अतीत की घटना हो गई , अब आप सवाल कर सकते हैं कि आगे क्या ? यहां सेवानिवृत्ति के बाद प्रतिदिन कुछ अधिक पाने या करने के सूत्र वाक्य हैं – लीक न बनने दें : कुछ ही दिनों में आप एक नई तरह की आजादी के अभ्यस्त हो जाओगे। सूर्योदय के समय न उठ कर बिस्तर पर अंगड़ाइयां कम से कम पहले एक सप्ताह तो बहुत आकर्षक रहेगा। इसके बाद , एक सूची बनाइए उन कामों की जो आप हमेशा से करना चाहते थे , ये काम कुछ भी हो सकते हैं , लेकिन ये आपको सुबह जल्दी उठाने और आपको घर से बाहर निकल कर कुछ करने का मादा देंगे। व्यायाम और पौष्टिक आहार : अब आप सेवानिवृत्त हैं और अ‍ब आप कुछ व्यायाम करने की व नियमानुसार आहार करने का मन बना ही लीजिए , जो पहले आप अनियमित रूप से...

सेवानिवृत्ति होने पर स्वास्थ्य/स्वास्थ्यकारक सेवानिवृत्ति

सेवानिवृत्ति होने पर स्वास्थ्य/स्वास्थ्यकारक सेवानिवृत्ति सामान्यत: सेवानिवृत्ति क्रियाशील कार्यालयी जिंदगी से सापेक्षता धीमी गति का घोषित संक्रमण दौर है । यह स्वत: कम तनावों , मानसिक और शारीरिक क्रियाओं वाला समय है , इसलिए शरीर को भी कम कैलोरी की जरूरत होती है। कम हुई क्रियाएं यदि वैकल्पिक गतिविधियों से बदली न जाएं और उबाऊ जिंदगी से बचने के लिए रंगरली स्वरूप अधिक खाना शुरू हो जाए तो परिणामस्वरूप मोटापा बढ़ेगा और इससे तात्कालिक तथा दीर्घ-अवधि की स्वास्थ्य संबंधी हानियां होंगी और व्यक्ति के अच्छेपन का नुकसान होगा। लम्बे समय तक स्वस्थ और आत्मनिर्भर रहने के लिए सावधानीपूर्वक लिया गया आहार आवश्यक है , यह तब और भी जरूरी हो जाता है जबकि आपकी शारीरिक गतिविधियां कम हो रही हों। लम्बे समय से चली आ रही चिकित्सीय समस्याएं रुग्ण स्वास्थ्य के लिए तब और भी अधिक भागीदार बन जाती हैं जबकि सेवानिवृत्ति की निष्क्रियता हो। चूंकि शारीरिक गतिविधियां कम होने से शरीर की फालतू कैलोरी का उपयोग नहीं हो पाता , इसलिए एक अच्छी सेवानिवृत्त जिंदगी को बनाए रखने के लिए आहार पर नियंत्रण प्राथमिक केंद्...

सेवानिवृत्त होने पर कैसे समायोजन करें?

सेवानिवृत्त होने पर कैसे समायोजन करें? जीवन का उतार होते हुए भी हम सेवानिवृत्ति की खुशियों को देखते हैं , सेवानिवृत्त होना जीवन का एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है । शोध बताता है कि बहुत से लोग संक्रमण के दौरान संघर्ष करते हैं। आप अपनी जिंदगी में क्या करें कि इस बदलाव को सकारात्मक बनाया जा सके ? सेवानिवृत्ति को एक महत्वपूर्ण जीवन परिवर्तन के रूप में जानें। हम सेवानिवृत्ति के बारे में , इसके स्वप्नलोक के बारे में बहुत कुछ सुनते हैं कि बहुत से लोग दिन प्रति दिन की जिंदगी के लिए तैयार नहीं होते। पहली चीज जो आप को समझनी है वह यह है कि सेवानिवृत्ति कोई बढ़ाई गई छुटी नहीं है। यदि आप मानसिक तौर पर सेवानिवृत्ति को एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के रूप में लेते हुए प्रयास करते हैं तो समायोजन आसान होगा। खाली रहने और काम करने के बीच में संतुलन बनाइए। यदि आपकी जिंदगी तनाव और व्यस्त कामों से भरी हुई है , तो ऐसे में वह दो अतियों के बीच डोलने की प्रवृत्ति अपना लेती है , या तो बहुत अ‍धिक काम या फिर कुछ भी नहीं करना। दोनों के बीच में संतुलन को साधो। सुनिश्चित करें कि आप इतने व्यस्त न हों कि आपक...

सेवा निवृत्ति के लिए तैयारी कैसे करें ?

                                                                                                                    सेवा निवृत्ति के लिए तैयारी कैसे करें ? कुछ ही लोग होंगे जो इस बात से सहमत नहीं होंगे कि सेवानिवृत्ति के लिए तैयारी महत्वपूर्ण है। वस्तुत: अधिकांश लोग सेवानिवृत्ति के लिए योजना बनाने को महत्वपूर्ण मानते हैं। यद्यपि, यह जानना कि इसके लिए क्या करना है, कैसे करना है और वस्तुत: इसे कैसे किया जाना है,ये तीन अलग-अलग पहलू हैं। शायद प्रत्ये...

वह अकेला आदमी ::1 ::

आज वह अपने जीवन की 95वीं वर्ष गाँठ के छोर पर खड़ा अपने जीवन-प्रवाह के अतीत खंड को निहार रहा था।जब से होश सम्हाला था,तब से अब तक की जीवन-यात्रा के दृश्य उसकी आँखों के सामने से चलचित्र की तरह दौड़े जा रहे थे। वह न उनका मूल्यांकन कर रहा था और न ही उसे अपने जीवन के अतीत से कोई लगाव ही रह गया था। बस वह तो निरपेक्ष भाव से उन सब घटनाओं को साक्षी बना देख रहा था। बचपन के आठ वर्ष एक छोटे से गाँव में बीते। इन आठ सालों में उसके मन पर जो प्रभाव पड़ा...उससे वह आज तक प्रभावित है। उसकी दार्शनिकता उस छोटे से गाँव में ही फलने-फूलने लगी थी, जब उसने अपनी माँ से रात को खेतों में शौच जाते समय,अपने साथ चलते हुए चाँद को देख कर माँ से सवाल पूछ बैठा था कि यह चाँद हमारे साथ-साथ क्यों चल रहा है?  जीवन के मूल प्रश्न तभी से उसके कोमल मनस-पटल पर उठने लगे थे। जीवन क्या है? मैं इस संसार में क्यों हूँ?  मरने पर क्या होता है? आदमी मर कर कहाँ चला जाता है? सबसे पहले मरते हुए उसने अपने एक पड़ौसी को देखा था। उसका नाम रामजा था। बहुत ही पेटू था वह। लोगों से माँग-माँग कर चवन्नियाँ इकट्ठी किया करता था,...

नई कहानी

(यशपाल जी ने नई कहानी को परिभाषित करते हुए यह कहानी लिखी थी : प्रस्तुत है यह कहानी आपके समक्ष) मुफस्सिल की पैसेंजर ट्रेन चल पड़ने की उतावली में फुंकार रही थी. आराम से सेकंड क्लास में जाने के लिए दाम अधिक लगते हैं. दूर तो जाना नहीं था. भीड़ से बचकर,एकांत में नई कहानी के सम्बन्ध में सोच सकने और खिड़की से प्राकृतिक दृश्य देख सकने के लिए टिकट सेकंड क्लास का ही ले लिया. गाड़ी छूट रही थी. सेकंड क्लास के एक छोटे डिब्बे को खाली समझ कर जरा दौड़ कर उसमें चढ़ गए.अनुमान के प्रतिकूल डिब्बा निर्जन नहीं था.एक बर्थ पर लखनऊ की नवाबी नस्ल के एक सफेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे. सामने दो ताजे-चिकने खीरे तौलिए पर रखे थे.डिब्बे में हमारे सहसा कूद जाने से सज्जन की आँखों में एकांत चिंतन में विघ्न का असंतोष दिखायी दिया. सोचा,हो सकता है,यह भी कहानी के लिए सूझ की चिंता में हों या खीरे-जैसी अपदार्थ वस्तु का शौक करते देखे जाने के संकोच में हों. नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया. हमने भी उनके सामने की बर्थ पर बैठ कर आत्म-सम्मान में आँखे चुरा ली. ठाली बैठे,कल्पना करते रहने ...