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सिद्धार्थ : हरमन हेसे का उपन्यास :: 2 ::

गतांक से आगे ... लेकिन सिद्धार्थ स्वयं खुश नहीं था। अंजीर के बाग की गुलाबी पगडंडियों पर घुमते हुए,बनी की नीली छाया में बैठकर चिंतन-मनन करते हुए ,प्रायश्चित के दैनिक स्नान के दौरान अपने अंग धोते हुए, आचरण की पूरी गरिमा के साथ छायादार अमराई में हवन करते हुए,सबके प्रिय,सबकी प्रसन्नता के कारण होते हुए भी,उसके अपने हृदय में आनंद नहीं था। नदी की लहरों से,रात के आकाश में टिमटिमाते सितारों से,सूर्य की पिघलती किरणों से,सपने और बेचैन ख़याल बहते हुए उस तक आते। हवन के घुमड़ते हुए धुएं से,ऋग्वेद के मंत्रों और ऋचाओं से नि:सृत होकर,वयोवृद्ध ब्राह्मणों की शिक्षा से रिसते और टपकते हुए स्वप्न और आत्मा की उद्विग्नता उसे घेर लेती।  सिद्धार्थ को अपने भीतर असंतोष के बीज महसूस होने लगे थे।  उसे एहसास होने लगा था कि उसके माता-पिता का स्नेह और उसके मित्र गोविंदा का प्रेम भी उसे हमेशा सुखी नहीं रख पाएगा,उसे शांति नहीं दे सकेगा, न उसे संतुष्ट और परिपूर्ण कर पाएगा। उसे इस बात का आभास होने लगा था कि उसके योग्य पिता और दूसरे शिक्षक,वे ज्ञानी ब्राह्मण अब तक अपनी शिक्षा का अधिकतर और सर्वोत्तम अंश उसे सौ...

"Why women are suffering around the world"? OSHO

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Rare recording!!! of OSHO spending time with his friends, must listen

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ओशो की एक प्रेस कान्फ्रेंस

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पुस्तक समीक्षा :: डॉ. सुप्रिया पी की पुस्तक हिंदी उपन्यास के विदेशी पात्र

हिंदी उपन्यासों में आए विभिन्न विदेशी पात्रों के माध्यम से समाज में आए विभिन्न परिवर्तनों और व्यक्ति की वैचारिक सोच को प्रतिबिंबित करती डॉ. सुप्रिया पी की पुस्तक "हिंदी उपन्यास के विदेशी पात्र" पढ़ने को मिली। पुस्तक में कुल पंद्रह ऐसे हिंदी  उपन्यास चुने गए हैं, जिनमें विदेशी पात्र आए हैं। ये उपन्यास हैं : अज्ञेय का "अपने अपने अज़नबी;  निर्मल वर्मा का "वे दिन": सुनीता जैन का "सफ़र के साथी" ; उषा प्रियंवदा का "रूकोगी नहीं राधिका"; प्रभाकर माचवे का "तीस चालीस पचास"; महेन्द्र भल्ला का " दूसरी तरफ"; योगेश कुमार का "टूटते बिखरते लोग"; भगवती स्वरूप चतुर्वेदी का "हिरोशिमा की छाया में"; मीनाक्षी पुरी का "जाने पहचाने अजनबी";नासिरा शर्मा का "सात नदियां एक समन्दर"; प्रभा खेतान का "आओ पेपे घर चलें"; मृदुला गर्ग का "कठगुलाब"; कमल कुमार का "हैमबरगर"; उषा प्रियंवदा का " अन्तर्वंशी"; राजी सेठ का "निष्कवच" । इस तरह छह पुरुष व आठ महिला लेखकों के उपन्या...

हिंदू नव वर्ष की शुभकामनाएं

सृष्टि (पृथ्वी)की आयु (अवधि) चार अरब बत्तीस करोड़ वर्ष है। अब तक यह एक अरब छयानवे करोड़ आठ लाख त्रेपन हजार एक सौ पंद्रह वर्ष की हो चुकी है और दो अरब पैंतीस करोड़ इक्यावन लाख छयालिस हजार आठ सौ पिचासी वर्ष प्रलय होने में शेष  हैं। विक्रम संवत्सर 2073 की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं ... चैत्र नवरात्र, युगाडी,गुडी पाडवा   की हार्दिक शुभकामनाएं  स्रोत::यजुर्वेद अध्याय३१,मंत्र १; ऋग्वेदअष्टक ८,अध्याय ७, मंत्र १ व ऋग्वेद अष्टक ६,अध्याय४,मंत्र २

सिद्धार्थ : हरमन हेसे का उपन्यास :: 01 ::

भाग-1 ब्राह्मण का बेटा  घर की छाया तले,नदी के किनारे,नावों के निकट धूप में साल और अंजीर की छांव में सिद्धार्थ ,ब्राह्मण का सुंदर बेटा, अपने मित्र गोविंदा के संग पला-बढ़ा। नदी किनारे उसके  पवित्र स्नान और पवित्र बलि-कर्म करते हुए भी सूर्य ने उसके छरहरे कंधों को सांवला बना दिया था। अमराई तले खेलते हुए , मां के गुनगुनाए हुए गीतों को सुनते हुए,अपने पिता की शिक्षाओं को सुनते हुए व ज्ञानियों की संगत करते हुए उसकी आंखों से छवियां गुजरती रही। सिद्धार्थ ने  बहुत समय तक ज्ञानियों के साथ चर्चाएं की, गोविंदा के साथ अनेक बार बहसें हुई और उसके साथ मनन-चिंतन के साथ ध्यान-साधना का अभ्यास किया। वह पहले से जानता था कि कैसे ओम - शब्दों के शब्द-महाशब्द,  का अंतस्थ में मौन उच्चारण किया जाए। सांस को कैसे भीतर लेना है और कैसे बाहर छोड़ना है,संपूर्णता के साथ। ऐसा करते समय उसका मस्तक दमकता था, अंत:करण के प्रकाश से।  वह जानता था कि अपने अस्तित्व की गहराई में कैसे आत्मा को पहचाना जाए। जो अनश्वर है और ब्रह्मांड के साथ एकाकार।  उसके पिता के हृदय में खुशी थी क्योंकि उसका बेटा बु...