जर जोरु और जमीन
एक पुरानी कहावत है कि हर झगड़े की जड़ जर,जोरु और जमीन ही होती है । यह कहावत आदिकाल युग और सामंतवादी युग तथा औद्योगिक युग की अपेक्षा इस उत्तर आधुनिक युग में अधिक सही प्रतीत होती है । आज समाज में नारी की स्थिति एक वस्तु से ज्यादा नहीं है और स्वयं नारी ने अपने रूप और सौंदर्य के बाजार में भाव लगाने शुरु कर दिए हैं । कोई अपने कौमार्य की बोली लगा रही है तो कोई स्वयं की खूबसूरती के जादू को बाजार में बेच रही है ।
विज्ञापन की दुनिया में नारी देह का प्रयोग आज अपरिहार्य्य हो गया है... शेविंग क्रीम और ब्लेड से लेकर अंडरवियर और बनियान तक के विज्ञापन नारी देह के बिना अधूरे हैं... सुंदर और असुंदर की बात दीगर ..सिर्फ देह बिकाऊ है... और इसके लिए नारी स्वयं उत्तरदायी है..
जवाब देंहटाएंyar mujhe ye joru wali bat samjh me aai kyun ki har ladai ke piche ek mahila ka hat hota he
जवाब देंहटाएंshekhar kumawat
http://kavyawani.blogspot.com/
बहुत बढ़िया लगा! उम्दा प्रस्तुती!
जवाब देंहटाएंjr ka arth enam RS 200000
जवाब देंहटाएंCHITTORGHARH
जर का अर्थ स्पस्ट करें
जवाब देंहटाएंजर का अर्थ स्पस्ट करें
जवाब देंहटाएंJar ka arth hai dhan
हटाएंजर का अर्थ रूपया पैसा धन दौलत
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