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वह अकेला आदमी ::3::

राम आश्रय सुरेश का बड़ा भाई गांव से एक कोस दूर दूसरे गांव में पढ़ने जाता था। बीच में एक अहिरों का खेत था। खेत में कूंआ था। कूएं के पास ही उनका घर था। एक दिन राम आश्रय ने स्कूल जाते हुए उनके वहां एक सुंदर कुत्ता देखा। जो बहुत बड़ा नहीं था। अहिरों ने उसे खेत और घर की सुरक्षा के लिए पाला था। कुत्ता सफेद रंग का था, जिस पर काले रंग की धारियां उसे और भी आकर्षक बना रही थी। राम आश्रय को वह कुत्ता बहुत आकर्षक लगा। उसने उस कुत्ते को वहां से उठा लेने की योजना बना ली। एक दिन स्कूल से घर लौटते हुए वह उस कुत्ते को वहां से उठा लाया।
जब वह गांव में कुत्ते के साथ अपने घर जा रहा था, तो उसको मनु ने देख लिया। उसने राम आश्रय से पूछा, "चच्चा, यह कुत्ता तो बहुत सुंदर है। कहां से लाए?"
राम आश्रय ने कहा, "स्कूल के पास मिला। अच्छा कोई अनजान आदमी इसके बारे में पूछे तो कहना तुम्हें कुछ नहीं मालूम। मैं इसे पालूंगा।"
"क्या तुम इसे किसी के घर से उठा लाए हो?" मनु ने पूछा।
"नहीं, नहीं, ...मुझे तो यह आवारा मिला। पर हो सकता है किसी का हो और वह इसे ढ़ूंढते हुए यहां आए और इसके बारे में पूछे तो उससे कहना तुम्हें उसके बारे में कुछ नहीं मालूम।"
" चच्चा, यदि यह किसी का  है और वह इसे लेने आएगा तो यह तुम्हें उसे लौटा देना चाहिए।" मनु ने कहा।
"तुम्हें जो कहा, उतना मानों। आगे मैं देख लूंगा।"
"लेकिन चच्चा इतना सुंदर कुत्ता आवारा नहीं हो सकता। जरूर किसी का होगा। वह इसे खोजते हुए जरूर आएगा। और किसी की चीज़ बिना उसकी अनुमति के अपने पास रखना अच्छी बात नहीं है।"

"लेकिन अगर तुमने बताया कि यह कुत्ता हमारे घर है तो मैं तुम्हें अच्छाई का सबक ज़रूर सिखाऊंगा।"
ऐसा कह कर राम आश्रय कुत्ते को लेकर अपने घर चला गया।
.
अगले दिन राम आश्रय स्कूल से घर लौटा तो कुछ डरा हुआ था। ऐसा लग रहा था किसी ने उसको खूब लताड़ा है। मनु ने उसको देख कर पूछा, "क्यों चच्चा, कुत्ते के बारे में किसी ने तुमसे पूछा क्या?"
राम आश्रय चिल्ला कर बोला, तुम्हें क्या? जाओ अपना काम करो। और हां, यदि कुत्ते के बारे में किसी से कुछ कहा तो तुम्हारी खैर नहीं।"
मनु फिर से गली में खेलने लगा। कुछ देर बाद उसने देखा कि एक औरत गोद में बच्चे को लिए उसकी ओर चली आ रही है। उसके पास आते ही औरत ने पूछा, "बेटा क्या तुमने सफेद रंग का कोई कुत्ता देखा है? तुम्हारे गांव के किसी लड़के को उसे हमारे घर से उठाते हुए किसी ने देखा था। मेरा यह बच्चा कल से उसके बिना रो-रो कर हाल बुरा किए हुए है। बता बेटा, क्या तुमने उसे यहां किसी के घर देखा है क्या?"
मनु ने कहा, " देखा तो है, वह राम आश्रय चच्चा उसे कल लाए थे और कह रहे थे स्कूल के पास मिला।"
कहां है उसका घर ? औरत ने पूछा।
मनु ने अगले घर की ओर इशारा करते हुए, औरत को घर का पता बता दिया।
कुछ देर बाद औरत कुत्ते के साथ  वहां से निकली तो मनु के चहरे पर मुस्कान तैर गई। मनु घर चला गया।
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अगली सुबह मनु अपने घर की दीवार के साथ खड़ा धूप सेंक रहा था। तभी राम आश्रय आया और उसने मनु के पेट में जोर से पहले मूका व फिर लात से वार किया। मनु दर्द से चिल्ला उठा। उसके रोने की आवाज़ सुन कर उसकी मां घर से बाहर निकली। तब तक राम आश्रय नज़रों से ओझल हो चुका था।
मां ने उसे चुप कराया और उससे पूछा क्या हुआ?
मनु ने काफी देर बाद सारा हाल कह सुनाया।
मां ने कहा, "मैं उसकी शिकायत ताई से करूंगी। लेकिन तुझे उसके मामलें में पड़ने की क्या ज़रूरत थी?"
मनु के कोमल मन पर आज फिर एक संस्कार छप चुका था।
   

टिप्पणियाँ

  1. पिछली कड़ी में सुरेश और इसमें उसका बड़ा भाई... मनु के चारित्रिक गढ़न में आसपास के इन पात्रों का बड़ा योगदान है.... जैसा कि आपने अंतिम पंक्ति में लिखा है - ये घटनाएँ सचमुच उसके कच्चे मन पर एक संस्कार मुद्रित कर रही हैं! देखी, सुनी सी लगने वाली ये घटनाएँ आगे चलकर कैसी कैसी परीक्षाएँ लेती हैं, इसकी प्रतीक्षा रहेगी!

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  2. पिछली कड़ी में सुरेश और इसमें उसका बड़ा भाई... मनु के चारित्रिक गढ़न में आसपास के इन पात्रों का बड़ा योगदान है.... जैसा कि आपने अंतिम पंक्ति में लिखा है - ये घटनाएँ सचमुच उसके कच्चे मन पर एक संस्कार मुद्रित कर रही हैं! देखी, सुनी सी लगने वाली ये घटनाएँ आगे चलकर कैसी कैसी परीक्षाएँ लेती हैं, इसकी प्रतीक्षा रहेगी!

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  3. पालतू जानवर इस तरह अबोध बच्चों के साथ स्नेह डोर में बँध जाते हैं, कि माँ-बाप भी उनके स्नेह / लगाव के आगे सब कुछ करने को विवश हो जाते हैं। उत्तम रचना ।

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