आध्यात्मिक विषयों पर केंद्रित यह ब्लॉग सत्य,अस्तित्व और वैश्विक सत्ता को समर्पित एक प्रयास है : जीवन को इसके विस्तार में समझना और इसके आनंद को बांटना ही इसका उद्देश्य है।
एक सनातन गूंज...जो गूंज रही है अनवरत...उसी गूंज की अनुगूंज यहां प्रतिध्वनित हो रही है...
सही कहा आपने! पुरुष स्त्री से पैदा होता है और सारी उम्र उसके आस-पास ही घूमता रहता है. मातृ-भाषा स्त्री ही ने सिखायी! सांख्य की दृष्टि में भी पुरुष और प्रकृति (यानि स्त्री)से ही सृष्टि को समझा गया है.
सही कहा आपने!
जवाब देंहटाएंपुरुष स्त्री से पैदा होता है और सारी उम्र उसके आस-पास ही घूमता रहता है. मातृ-भाषा स्त्री ही ने सिखायी!
सांख्य की दृष्टि में भी पुरुष और प्रकृति (यानि स्त्री)से ही सृष्टि को समझा गया है.
मनोज बाबू .. “ओर” को “और” कर लीजिए..अर्थ बिगड़ता है..हम त सारा जीबन बस स्त्रियों से ही सीखते आए हैं… हमरी माता, हमरी पत्नी और हमरी बिटिया रानी.
जवाब देंहटाएंधन्यवाद सलिल जी भूल की ओर ध्यान दिलाने के लिए, त्रुटि ठीक कर दी गई है ।
जवाब देंहटाएंसही कहा ...
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