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विद्वान,पंडित और पुरोहित

विद्वान : विद्वान वह है जो द्वैत के भेद का ज्ञान रखता है । जो चीजों को टूकड़ों में तोड़-तोड़ कर समझता है और समझाता है । वह द्वैत का विज्ञानी होता है। बिरले ही विद्वान होते हैं जो अद्वैत का अनुभव रखते हैं । 

पंडित : पंडित शास्त्र का जानकार होता है लेकिन स्वयं का अनुभव रखे यह जरूरी नहीं । उसका ज्ञान उधार का ज्ञान होता है । 

पुरोहित : पुरोहित शास्त्र सम्मत विधि द्वारा  और  पूर्वजों के दिखाए मार्ग पर चलते हुए नागरिकों के हित के लिए यज्ञ आदि अनुष्ठान संपन्न करता है । पुरोहित को परम्परा निर्वाह में ही ज्ञान दिखाई पड़ता है । 

टिप्पणियाँ

  1. तीनो की व्याख्या बेहतरिन लगी .अति सुन्दर .स्वतन्त्रता दिवस की ढेरो बधाईयां आपको .

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  2. तीनों की खोज एक हो भी,तो रास्ते शायद कहीं न ले जायें!

    ये उपर जाने कि लिये अपनी अपनी तरह की सीढीयां बनाने मे लगें हैं..जबकि वहां जाने के लिये पखं फैलने हैं..उडना है आकाश की असुरक्षा में!!

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  3. आज दावा तो हर कोई करता है कि वो पंडित, विद्वान अथवा पुरोहित है, लेकिन असल में सब शून्य हैं... खोखला हैं अंदर से..

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