सरलता
ओशो ने चित्त की शांति के लिए तीन सूत्रों की बात बार-बार की है। ये सूत्र हैं:सरलता,सजगता और शून्यता। आज की इस पोस्ट में हम जानेंगे कि सरलता क्या है? सरलता क्या नहीं है? सरलता के मार्ग क्या हैं?सरलता कैसे आए? जो भी बाहर से ओढ़ा जाता है वह हमें जटिल बनाता है। बाहर से ओढ़ी गई सादगी,सरलता,विनम्रता मनुष्य को जटिल बनाती है और जो लोग भीतर जटिल होते हैं अक्सर बाहर सादगी,सरलता और विनम्रता का वेश बना लेते हैं;केवल इसलिए नहीं कि दुनिया को धोखा दे सकें बल्कि स्वयं को भी धोखा दे सकें। दुनिया में जटिल लोग सरल होने का अभ्यास कर लेते हैं। इस ओढ़ी हुई सरलता का कोई मूल्य नहीं। कोई अत्यंत विनम्रता प्रदर्शित करे,उससे वह सरल नहीं हो जाता है। क्योंकि विनम्रता के पीछे अक्सर अहंकार खड़ा रहता है और विनम्र आदमी हाथ जोड़कर सिर तो झुकाता है,लेकिन अहंकार नहीं झुकता है और विनम्र आदमी को यह भाव बना रहता है कि मुझसे ज्यादा और कोई भी विनम्र नहीं है और उसको यह भी आकांक्षा होती है कि मेरी विनम्रता और मेरी सरलता स्वीकृत की जाए और वह सम्मानित हो। सरलता को इस प्रकार अभ्यास से ऊपर से साधना आसान है,लेकिन उसका कोई मूल...