सोमवार, 21 अक्तूबर 2013

सेवानिवृत्ति के पश्चात गतिविधियां- प्रतिदिन अधिकतम पाने के सूत्र

सेवानिवृत्ति के पश्चात गतिविधियां-
प्रतिदिन अधिकतम पाने के सूत्र


कल्पना कीजिए कि आप अलार्म घड़ी की आवाज सुन कर सुबह रात की नींद से उठते हैं और तभी आपको ख्याल आता है कि आज तो कहीं नहीं जाना है। सेवानिवृत्ति के बाद का पहला दिन जहां बहुत आश्चर्य वाला होता है वहीं यह दिन दुविधा का भी होता है। सुबह 4 बजे उठने की आदत तो अब अतीत की घटना हो गई, अब आप सवाल कर सकते हैं कि आगे क्या ? यहां सेवानिवृत्ति के बाद प्रतिदिन कुछ अधिक पाने या करने के सूत्र वाक्य हैं –
  1. लीक न बनने दें : कुछ ही दिनों में आप एक नई तरह की आजादी के अभ्यस्त हो जाओगे। सूर्योदय के समय न उठ कर बिस्तर पर अंगड़ाइयां कम से कम पहले एक सप्ताह तो बहुत आकर्षक रहेगा। इसके बाद,एक सूची बनाइए उन कामों की जो आप हमेशा से करना चाहते थे, ये काम कुछ भी हो सकते हैं, लेकिन ये आपको सुबह जल्दी उठाने और आपको घर से बाहर निकल कर कुछ करने का मादा देंगे।
  2. व्यायाम और पौष्टिक आहार : अब आप सेवानिवृत्त हैं और अ‍ब आप कुछ व्यायाम करने की व नियमानुसार आहार करने का मन बना ही लीजिए, जो पहले आप अनियमित रूप से करते रहें हैं उसे नियमित करने का संकल्प लें। किसी व्यायामशाला के सदस्य बनें या किसी दोस्त को बुलाएं और उसके साथ सप्ताह में कम से कम 3 दिन सुबह टहलने का वादा करें। संतुलित आहार का चयन करें। सही मायने में उचित मात्रा में व्यायाम और आहार का संतुलित व नियमित प्रयोग किया जाए तो आपकी मानसिक,भावनात्मक और शारीरिक स्वास्थ्यप्रदतता बनी रहेगी।
  3. अ‍पनी रुचियों को पुन: जीवित करें : क्या आप हमेशा से कुछ करना चाहते थे, लेकिन उसे करने का कभी अवसर या समय नहीं मिला? यात्रा, चित्रकारी,लिखना और बागवानी जैसे शौक जो अब तक पूरे नहीं हो सके थे,इन्हें अब पूर्णकालीक कौशल में ढाला जा
“प्रेम सभी मौसमों में रहने वाला फल है,जो हर समय उपलब्ध है,और सभी की पहुंच में है।“ – मदर टरेसा 

सकता है। शायद आप इतिहास,समाजशास्त्र या अन्य किसी कला की कक्षा लगाना चाहते थे। अ‍ब आप यह कर सकते हैं या शायद आप अपने हुनर से घर से ही कोई व्यापार शुरु करना चाहते थे वह सब अब आप कर सकते हैं।
  1. मस्तिष्क को अभ्यास की आदत डालें : अध्ययन बताते हैं कि मस्तिष्क से किए जाने वाले अभ्यास आपकी ज्ञानात्मक क्षमता को 10 वर्ष तक बढ़ा सकते हैं और स्क्रबल(संगति बिठाने का खेल), माथा-पच्ची(उलझन को सुलझाना) या किसी समस्या पर ध्यान केंद्रित करना जिसमें की विश्लेषणात्मक बुद्धि की जरूरत हो जैसे अभ्यास उद्दीपन शक्ति को बढ़ाते हैं। शरीर के व्यायाम के साथ-साथ मस्तिष्क के अभ्यास भी आपको जारी रखने चाहिएं।
सेवानिवृत्ति बहुत सी विकल्प छवियों को समाए हुए है। इसे आप घर में बैठ कर गुजार सकते हैं,क्योंकि आखिरकार आपने बहुत खून-पसीने से मेहनत कर कमाई की है और अब आपको आराम की योग्यता हासिल है; या आप किसी काम में लग सकते हैं, जिससे न केवल आपकी जीवन-शैली सुधरेगी बल्कि आपके पास उन सब चीजों को वहन करने की क्षमता और अवसर होगा जिन्हें आपने अपने जीवन में चाहा है। बाद वाला विकल्प अधिक उत्तेजित करने वाला है, क्या नहीं ?
प्रतिदिन अधिकतम पाने की कोशिश करें- और वह अ‍आप कर सकते हैं ...
  
व्यक्ति व्यक्ति है, यह कोई मायने नहीं रखता कि वह कितना छोटा है। - डॉ. सिउस्स
   
अनुवाद : मनोज भारती 

बुधवार, 16 अक्तूबर 2013

सेवानिवृत्ति होने पर स्वास्थ्य/स्वास्थ्यकारक सेवानिवृत्ति

सेवानिवृत्ति होने पर स्वास्थ्य/स्वास्थ्यकारक सेवानिवृत्ति


सामान्यत: सेवानिवृत्ति क्रियाशील कार्यालयी जिंदगी से सापेक्षता धीमी गति का घोषित संक्रमण दौर है। यह स्वत: कम तनावों, मानसिक और शारीरिक क्रियाओं वाला समय है,इसलिए शरीर को भी कम कैलोरी की जरूरत होती है। कम हुई क्रियाएं यदि वैकल्पिक गतिविधियों से बदली न जाएं और उबाऊ जिंदगी से बचने के लिए रंगरली स्वरूप अधिक खाना शुरू हो जाए तो परिणामस्वरूप मोटापा बढ़ेगा और इससे तात्कालिक तथा दीर्घ-अवधि की स्वास्थ्य संबंधी हानियां होंगी और व्यक्ति के अच्छेपन का नुकसान होगा। लम्बे समय तक स्वस्थ और आत्मनिर्भर रहने के लिए सावधानीपूर्वक लिया गया आहार आवश्यक है, यह तब और भी जरूरी हो जाता है जबकि आपकी शारीरिक गतिविधियां कम हो रही हों। लम्बे समय से चली आ रही चिकित्सीय समस्याएं रुग्ण स्वास्थ्य के लिए तब और भी अधिक भागीदार बन जाती हैं जबकि सेवानिवृत्ति की निष्क्रियता हो। चूंकि शारीरिक गतिविधियां कम होने से शरीर की फालतू कैलोरी का उपयोग नहीं हो पाता, इसलिए एक अच्छी सेवानिवृत्त जिंदगी को बनाए रखने के लिए आहार पर नियंत्रण प्राथमिक केंद्रबिंदु होगा। इस संबंध में यहां कुछ सूत्र वाक्य दिए जा रहे हैं :-
1.      प्रतिदिन 300 कैलोरी का उपयोग निश्चित हो, इसके लिए प्रतिदिन 40 मिनट तक तेज गति से चलिए।
2.      सामान्य स्वास्थ्य परिदशाओं को सुधारने हेतु, विशेषत: हृदय संबंधी, मधुमेह(डायबिटीज) और आर्थराईट्स(हड्डियों संबंधी) रोगों से बचाव के लिए प्रतिदिन एक चमच्च अलसी पाऊडर खाएं।
3.      प्रतिदिन एक केला खाएं क्योंकि इसमें प्रचुर मात्रा में पौटाशियम होता है,जो रक्त दबाब(ब्लैड प्रशैर)को कम रखने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। इससे क्षुधा कम होती है और इसे एक कम कैलोरी(लगभग 80-100 कैलोरी)वाले नाश्ते के रूप में लिया जा सकता है बनिस्बत कि वड़ा, चकली, पकौड़ा या पेस्ट्री लें जिनमें लगभग 200 से 250 कैलोरी होती है
4.      प्रतिदिन कम से कम दो गिलास मलाई वाला दूध अवश्य पिएं, इससे हड्डियां मजबूत रहेंगी।
“प्यार चाहने से नहीं मिलता है, बल्कि उसके लिए आपको अपने भीतर झांकना होगा और जो अड़चने,बाधाएं,दीवारें आपने प्यार के विरुद्ध खड़ी कर रखी हैं, उन्हें गिरा देना होगा।“ -जलालुद्दीन रूमी,सूफी कवि (1207-1273)

5. नियमित व्यायाम,योग और संतुलित भोजन शरीर में एचडीएल स्तर(अ‍च्छा कोलेस्ट्राल)को बनाए रखने में बड़ी मदद करता है। चरबी वाले पदार्थों का सेवन सावधानी से करें। मांस-मच्छ्ली,नारियल तेल और पॉम ऑयल का सेवन सीमा में कीजिए। ट्रांसफैटी एसिड (महीन चरबीयुक्त अम्ल) का सेवन न करें जो प्राय: केक,पेस्ट्री,बर्गर और फ्रैंच फ्राई में पाया जाता है।
6. प्रतिदिन कम से कम 8 से 10 गिलास पानी जरूर पिएं, जिससे आपका शरीर पर्याप्त रूप से जलयोजित बना रहे।
7. अम्लीयता को शरीर में ठीक रखने के लिए सुबह-सुबह 8 से 10 पत्ते पौदीना के चबाएं। खीरा जूस और कच्चे नारियल का जूस भी एसिडिटी(अ‍म्लीयता) को ख़त्म करने में सहायक है।
8. पेट की चरबी को कम कीजिए। पेट की चरबी स्वास्थ्य जोखिमों बढ़ा देती है। स्त्रियों में कमर का घेराव 35 इंच से ज्यादा और पुरुषों में यह 40 इंच से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इसे हमेशा ध्यान में रखिए।
9. मधुमेह के रोगियों को अपने स्वास्थ्य को सख्ती से नियंत्रित रखना चाहिए। ये रोगों के प्रति संवेदी होते हैं। इन्हें मसूढ़ों का संक्रामण होने का खतरा बना रहता है। मधुमेह के रोगियों को आंखों के डॉक्टर के पास नियमित रूप से जांच के लिए जाना चाहिए। ताकि आंखों का कोई रोग हो तो उसका तुरंत पता चल सके,जितनी जल्दी रोग का पता चलेगा उतनी ही शीघ्रता से ईलाज संभव हो सकेगा।
10. मिठाइयों के प्रति दिल ललचाने के बनिस्बत फ्रूट, फ्लेवर्ड फ्रूट, दही या ड्राई-फ्रूट का सेवन करें।
11. 10 से 15 ग्राम रेशे वाले पदार्थों को अपने आहार में शामिल करने से कोई भी व्यक्ति अपने रक्त कोलेस्ट्रॉल स्तर को काफी हद तक कम कर सकता है। अधिक रेशे वाला भोजन लेने से कब्जियत से बचाव होता है और शरीर के भार को नियंत्रित रखने में मदद मिलती है। अ‍पने भोजन में हरे पत्ते वाली सब्जियां,फल,मोटे दाने वाली दालें,अन्न,सूखी सेम,मटर और ड्राई-फ्रूट का अधिक प्रयोग करें।
‌- रेवथी नटराजन- आहार विशेषज्ञ
सेवानिवृत्ति एक स्थिर घटना नहीं है,जो किसी निश्चित समय में निर्धारित हो और जिसे चिह्नित करने के लिए स्वर्ण-घड़ी की जरूरत हो। बल्कि सेवानिवृत्ति...यदि यह सही शब्द है...तो यह एक बहुदिशात्मक प्रक्रिया है जिसे पूरा होने में वर्षों लग जाते हैं।“ – एलिस राडोस

         अनुवाद : मनोज भारती                                                                 

शनिवार, 28 सितंबर 2013

सेवानिवृत्त होने पर कैसे समायोजन करें?

सेवानिवृत्त होने पर कैसे समायोजन करें?


जीवन का उतार होते हुए भी हम सेवानिवृत्ति की खुशियों को देखते हैं,सेवानिवृत्त होना जीवन का एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है। शोध बताता है कि बहुत से लोग संक्रमण के दौरान संघर्ष करते हैं। आप अपनी जिंदगी में क्या करें कि इस बदलाव को सकारात्मक बनाया जा सके?
सेवानिवृत्ति को एक महत्वपूर्ण जीवन परिवर्तन के रूप में जानें। हम सेवानिवृत्ति के बारे में, इसके स्वप्नलोक के बारे में बहुत कुछ सुनते हैं कि बहुत से लोग दिन प्रति दिन की जिंदगी के लिए तैयार नहीं होते। पहली चीज जो आप को समझनी है वह यह है कि सेवानिवृत्ति कोई बढ़ाई गई छुटी नहीं है। यदि आप मानसिक तौर पर सेवानिवृत्ति को एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के रूप में लेते हुए प्रयास करते हैं तो समायोजन आसान होगा।
खाली रहने और काम करने के बीच में संतुलन बनाइए। यदि आपकी जिंदगी तनाव और व्यस्त कामों से भरी हुई है,तो ऐसे में वह दो अतियों के बीच डोलने की प्रवृत्ति अपना लेती है, या तो बहुत अ‍धिक काम या फिर कुछ भी नहीं करना। दोनों के बीच में संतुलन को साधो। सुनिश्चित करें कि आप इतने व्यस्त न हों कि आपके पास थोड़ा समय भी न हो। यह आपके मस्तिष्क और शरीर के लिए महत्वपूर्ण है कि उन्हें कुछ समय के लिए विराम का अवसर मिल सके,लेकिन यह विराम इस हद तक न हो कि वह अवनति बन जाए।
जिम्मेदारियों के साथ आमोद-प्रमोद ही संतुलन है। एक अति पर नए सेवानिवृत्तक, किए जाने वाले कार्यों की सूची बनाते हैं,जिन्हें वे लम्बे समय से स्थगित करते आ रहे थे। शौचालय की सफाई करना,घर की रंगाई-पुताई करना जैसे रोके गए कार्य ही अब उनका रोजगार हो गया। दूसरी तरफ, कुछ लोग अधोगामी फुरसत की ओर अपने जीवन को मोड़ देना शुरु करते हैं,जैसे एक खेल के बाद कोई दूसरा और खेल खेलना। एक अच्छा सेवानिवृत्तिक न तो सारा समय कामों को निपटाने में लगाता है और न ही खेल खेलने में। कार्यों को पूरा करने के लिए समय निकालना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि आराम और खेल गतिविधियों के लिए। कार्य व खेल की सही संतुलित स्वास्थ्यप्रद खुराक ही सर्वोत्तम सेवानिवृत्ति का जीवन सृजित करती है।
  “जब अंधेरा हो तो उस पर झलाइए नहीं, बल्कि एक दीपक जलाइए।“ -अ‍ल गोरे 
दिनचर्या बनाइए : जिसे आपने करना चाहा उसे तभी कर लेने की क्षमता होना ही आदर्श सेवानिवृत्ति है। सम्मानित सेवानिवृत्ति के लिए अभी से दिनचर्या बनाना शुरु कर दीजिए। आपको प्रयोग करना है और कुछ आदर्श प्रतिमानों(पैटर्नस)को चुनना है,जिसके बदले में आप आप पाएंगे कि आपके पास आपके द्वारा किए जाने वाले कार्यों के लिए अधिक समय है और आप उन कार्यों को तभी कर पाने में सक्षम हैं जब आपने उन्हें करना चाहा और यह तभी होगा जब आप शुरु से ही अपनी दैनिक चर्या बना कर चलेंगे।
सहयोग और संबंधों को पहचानिए : सेवानिवृत्ति पर कार्यालयी कार्यों से अचानक संबंध टूट जाने से बहुत से लोगों को आघात पहुंच सकता है। यदि आपका जीवन-साथी अभी भी सेवा में है और परिवार तथा मित्र अपनी थका देने वाली जिंदगी में व्यस्त हैं तो नव-सेवानिवृत्तियों को अचानक अहसास होने लगता है कि वे अकेले और दूसरों से कटे हुए हैं। इस प्रवृत्ति से बचने के लिए सम-मानसिकता वाले मित्रों का समूह तैयार कीजिए।
तुरंत स्वास्थ्यप्रद प्रतिमान स्थापित करें :सेवा में रहते हुए समय की कमी रहते यदि आपने व्यायाम नहीं किया और सही ढंग से भोजन नहीं लिया तो अब सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद इनके लिए अच्छी आदतों का विकास कीजिए। सुनिश्चित कीजिए कि आप कुछ समय के लिए बाहर निकलें और किसी प्रकार का व्यायाम करें। अपने भोजन की आदतों पर गौर करें और निश्चित करें कि क्या वे सर्वोत्तम रूप से चयनित हैं। यदि नहीं, तो अभी से स्वास्थ्यप्रद भोजन लेना शुरु कीजिए।
सीखने के लिए कुछ नया खोजिए : शरीर की ही तरह अपने मस्तिष्क को सक्रिय और मननशील रखना सेवानिवृत्तियों के लिए सफल बदलाव हेतु सर्वोपरि है। कुछ समूहों के सदस्य बन जाइए,पुस्तकें पढ़िए और कुछ खेल खेलिए। यदि आपके कोई शौक नहीं हैं तो थोड़ा समय निकाल कर नई रुचियां विकसित कीजिए। आपके लिए अनेक अलग-अलग क्रिया-प्रक्रिया हैं,जिनको आप आजमा सकते हैं। लेकिन सीखने की प्रक्रिया का आनंद लें और देखें कि आपकी रुचि अनुरूप क्या मेल रखता है।
अत्यधिक आराम पसंद मत बनिए : नई चुनौतियां और जोखिम लेना सीखिए। मनुष्य सर्वाधिक रूप से तब जीवंत अनुभव करता है जबकि वह अपने आरामदायक क्षेत्र से बाहर निकल कर कार्य करता है। इसका यह मतलब नहीं है कि आप स्वयं को खतरे में डालें,बल्कि इसका अर्थ है कि आप अपना विस्तार(आकाश) खोजें। नए लोगों से मिलिए,स्वयंसेवक बनो,नया खेल या नए शौक को अपनाएं। यदि आप कुछ नया करने के लिए अनिच्छुक हैं क्योंकि आप वहां स्वयं को सहज महसूस नहीं कर पा रहे, तो जाने कि वह क्या कारण है जो आपको असहज कर रहा है। शिकायत का भाव सबसे बुरा चुनाव है,जो आप सेवानिवृत्त होने पर सबसे पहले करते हो।
“जब एक व्यक्ति सेवानिवृत्त होता है तो उसकी पत्नी दूसरी बार अपने पति को पूरा पाती है,लेकिन आय आधी ही।“ -ची ची रोड्रिगुएज 
सेवानिवृत्ति जीवन का महत्वपूर्ण बदलाव है। यह जीवन का सर्वाधिक सम्माननीय समय हो सकता है,यदि इन सुझावों का पालन किया जाए। आप जैसी जिंदगी जीना चाहते हैं, उसी तरह की जिंदगी का विकास आपके हाथ में है।
लेख स्रोत : http://EzineArticles.com

“आप सोचते हैं कि आपही समस्या हैं,लेकिन वस्तुत: आप समाधान हैं। आप सोचते हैं कि आप दरवाजे पर लगे बंद ताले हो,लेकिन वस्तुत: आप वह चाबी हैं,जो इस ताले को खोल सकती है।“ - जलालुद्दीन रुमी,सूफी कवि (1207-1273)

अ‍नुवाद: मनोज भारती 

रविवार, 22 सितंबर 2013

सेवा निवृत्ति के लिए तैयारी कैसे करें ?


                                                                                                                  
सेवा निवृत्ति के लिए तैयारी कैसे करें ?

कुछ ही लोग होंगे जो इस बात से सहमत नहीं होंगे कि सेवानिवृत्ति के लिए तैयारी महत्वपूर्ण है। वस्तुत: अधिकांश लोग सेवानिवृत्ति के लिए योजना बनाने को महत्वपूर्ण मानते हैं। यद्यपि, यह जानना कि इसके लिए क्या करना है, कैसे करना है और वस्तुत: इसे कैसे किया जाना है,ये तीन अलग-अलग पहलू हैं।
शायद प्रत्येक व्यक्ति सेवानिवृत्ति की तैयारी अलग ढ़ंग से करता है। जो लोग सेवानिवृत्ति के नजदीक हैं, उनकी तैयारियां वित्तीय,सामाजिक और मनोवैज्ञानिक होंगी। जिनकी सेवानिवृत्ति को कुछ वर्ष बाकी हैं उनका ध्यान एकपक्षीय होगा और वह भी वित्तीय होगा। फिर भी,सेवानिवृत्ति भयाक्रांत न हो,इसके लिए जरूरी है कि आप जाने कि सेवानिवृत्ति के लिए किस तरह से तैयार हुआ जाए।
1)     अपनी वित्तीय स्थिति का मूल्यांकन कीजिए
 यदि आपने पहले ही गंभीरता से सेवानिवृत्ति की तैयारी शुरु कर दी है, तो आपको अपनी सेवा-निवृत्ति की योजनाओं और अपनी संपूर्ण वित्तीय स्थिति की समीक्षा की जरूरत है। यदि आप कर्जदार हैं तो यह आपकी योजनाओं को प्रभावित करेगा। इससे पूर्व कि आप आगे की तैयारी करें,आपको अपनी वर्तमान स्थिति का मूल्यांकन करना होगा। आपको यह भी जानना और समझना होगा कि आपके वर्तमान सेवानिवृत्ति-लाभ क्या होंगे,क्योंकि अंतत: सेवानिवृत्ति की योजना बनाना वस्तुत: एक वित्तीय योजना का ही प्रकार्य है।
2)     अपनी सेवानिवृत्ति के लिए एक दृष्टि(सोच) बनाइए
आदर्श सेवानिवृत्ति के लिए आपका एक निश्चित सपना होना चाहिए। जब आप सपना संजोएं तो इस बात का ध्यान रखें कि वह असंभावी योजना बन कर न रह जाए। इसके लिए वास्तविक जांच बिंदु होंगे आपकी वित्तीय स्थिति,संसाधन और यदि आवश्यकता हो तो आपकी त्याग की इच्छाशक्ति।  

“आंख के बदले आंख की नीति संपूर्ण संसार को अंधा बना कर छोड़ती है।“ - महात्मा गांधी


3)      अपनी सेवानिवृत्ति के लक्ष्यों को निर्धारित कीजिए
आपकी सेवानिवृत्ति के लक्ष्य आपके सपनों को मापे जा सकने वाले लक्ष्यों में परिवर्तित कर देंगे। जब आप लक्ष्य निर्धारित कर रहें हों,तो आपके मन में एक समय-सीमा निश्चित हो। आपको इस बात का भी निश्चय होना चाहिए कि आपकी सेवानिवृत्ति के सपनों का मूल्य क्या होगा। तभी आप आगे के निश्चित लक्ष्यों को निर्धारित कर पाएंगे, जबकि आप निश्चित होंगे कि संचित सेवा निवृत्ति निधि और आपकी आय-वर्ग(पेंशन/वार्षिकी खर्चे) का आप किस दिशा में उपयोग निश्चित करेंगे।
4)     आप कहां हैं और आप कहां होना चाहते हैं की तुलना करें –
अपनी जीवन शैली की जरूरतों के मुताबिक एक सरल वित्तीय गणना द्वारा आप निश्चय कर सकते हैं कि एक निर्धारित संचित दर से लक्ष्य तक पहुंचने के लिए आपको और कितना अधिक चाहिए।
5)     मुद्रा-स्फिति संख्यांक और 30 वर्षों की सेवा सेवानिवृत्ति अवधि
बढ़ी हुई जीवन आकांक्षाएं,आकस्मिक खर्चे, निश्चित आय और बढ़ती हुई उच्च जीवन अपेक्षाओं से मिलने वाले परिणाम ये सब सेवानिवृत्ति की वास्तविकताएं हैं। यदि आप इनकी पूर्णतया जिम्मेवारी नहीं लेते, तो आप ख्याली पुलाव बनाते हुए रह सकते हैं। आपके हाथ विलाप और निराशा से भरे होंगे जबकि आपको अहसास होगा कि आपकी लक्षित आय बहुत कम है या सेवानिवृत्ति के बाद मुद्रा-स्फिति के प्रभाव से आप अपनी जवाबदेही में असफल हुए हैं।
6)     निश्चित कीजिए कि लक्ष्य पर पहुंचने के लिए आपको क्या करने की आवश्यकता है
आपने इन पर जरूर गौर किया होगा –
                           I.          सेवानिवृत्ति के बाद आप कैसी जीवन शैली चाहते हैं
                         II.          सेवानिवृत्ति की बचत-राशियों और निवेशों से मिलने वाले औसत प्रतिलाभ क्या होंगे
                        III.          सेवानिवृत्ति पर कौन से वित्तीय उत्पादों को तैयार करने (आय का साधन) का चयन किया है
                        IV.          आपकी सेवानिवृत्ति आयु

“सत्य सवालों से नहीं डरता।“ – परमहंस योगानंद


आप उन सभी घटकों को नियंत्रित कर सकते हैं जो यह निश्चित करते हैं कि आप कैसे अपने लक्ष्य तक पहुंचे। या तो आपको अधिक वास्तविक लक्ष्यों को अपनाना होगा या फिर भविष्य में पीछे रहोगे क्योंकि आपने बहुत देरी से सोचा।
7)     अपने सेवानिवृत्त जीवन के लिए निवेश-क्षेत्र को विकसित करो या सुधारो
निवेश-क्षेत्र का विविधिकरण विशेषत: आपकी सेवानिवृत्ति निधि पर लागू होता है, चाहे आप सेवानिवृत्ति के बहुत निकट हों या दूर, आपको एक इष्टतम निवेश-क्षेत्र निर्मित करने की जरूरत है जिसमें कि आय और नकद विकल्प तथा पूंजी वृद्धि की संभावनाओं के साथ सुरक्षा भी उपलब्ध हो,यह सब वृद्धि विकल्प(ग्रोथ-आप्शन्स) द्वारा प्रस्तावित होते हैं।
अपने सेवानिवृत्त निवेश-क्षेत्र को जिस ढंग से आप विविधता देंगे वह आपके निवेश क्षितिज(फैलाव)पर आधारित होगा। आपको मुद्रा बाजार निधियां,म्युचुअल फंड, वार्षिकी(निश्चित या परिवर्तनीय),स्टॉक और विदेशी विनिमय(फोरेक्स-मार्केट) में चयन करना होगा। जो सेवानिवृत्ति के निकट हैं उन्हें आय-वर्ग सृजित करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। जिनके पास लम्बी निवेश अवधि है,उन्हें पूंजी वृद्धि पर अधिक जोर देना चाहिए।
8)     अपनी सेवानिवृत्ती की योजना हेतु बजट विकसित करें
इससे पूर्व दिए गए चरण योजना की तैयारी पर केंद्रित थे। इस क्रियान्वयन चरण में,आपको अपने संसाधनों को तद्नुसार बांटना होगा। आपको जानना होगा कि आप कौन सा वाहन इस्तेमाल करें और उसके लिए किस हद तक आप कर्ज सेवा लें, बंधक को घटाएं,आपकी निश्चित वार्षिकियां क्या होंगी, अधिमानित स्टॉक व मुद्रा बाजार निधियों में किस तरह बढ़ें। भटकन और विचलन से बचने के लिए आपको इस बजट का पालन करना होगा।
9)     अपनी कार्य-योजना पर निगरानी रखिए
सेवानिवृत्ति के लिए तैयारी एक सतत यात्रा है,यह एक गंतव्य स्थल पर जा कर ठहर जाने जैसा नहीं है। आपकी परिस्थितियां निरंतर बदल रही हैं,उसी तरह आपकी सेवानिवृत्ति के लक्ष्य भी। आपकी सेवानिवृत्ति की तैयारी में यह सब परिलक्षित होना चाहिए।

“जो हमारे पीछे छूट जाता और जो हमारे सम्मुख है, वे सब उस की तुलना में बहुत छोटे मामले हैं जो हमारे भीतर है।“ – राल्फ वाल्डो एमर्सन


यह मायने नहीं रखता कि आप जीवन के किस पड़ाव पर हैं। सेवानिवृत्ति के लिए कार्य-योजना बनाना जरूरी है। आप सेवानिवृत्ति के लिए यह योजना कैसे बनाते हैं और सेवानिवृत्ति पश्चात की चुनौतियों के प्रति आपकी जागरुकता का स्तर क्या है, यही वे चीजें हैं जो आपके द्वारा अपनाई गई विधि की सफलता को निश्चित करेंगी। सेवानिवृत्ति की योजना को सफल बनाने के लिए अनेक मार्ग हैं। फिर भी, इन विविध मार्गों को पहचाने के बहुत से संयोग बनेंगे जब आप इन विस्तृत दिशानिर्देशों पर चलोगे।
लेख स्रोत : http://EzineArticles.com

“अ‍अअ‍तीत का अनुगमन न करें। स्वयं को भविष्य में मत खोने दें। अतीत बीत चुका है,वह आगे नहीं है। भविष्य अभी होने को है। साधक जीवन में अभी और यहीं गहराई तक देख कर स्थिरता और स्वतंत्रता को प्राप्त होता है।“ - बुद्ध

                                                                                                                                                                            
(यह लेख मेरे  द्वारा अनूदित है)