बुधवार, 31 अगस्त 2011

My thoughts/मेरे विचार


  • SINCERITY comes from heart;hypocrites never know sincerity.
  • In the existence only man tries to be perfect. Nothing but existence itself perfect.
  • Nothing is transparent unless you have eyes to see through things.
  • Without zest zenith never comes.
  • Self image sets the boundaries of individual perspective.
  • Without a good rapport no team exists. With a good rapport team definitely wins.
  • BOSS stands for Big Offer to Sure Success.
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  • निष्कटता हृदय से आती है;ढ़ोंगी इसे कभी नहीं समझ सकते।
  • अस्तित्व में मनुष्य ही पूर्ण होने का प्रयास करता है। परंतु अस्तित्व के अतिरिक्त कुछ भी पूर्ण नहीं है।
  • जब तक चीजों को आर-पार देखने वाली आंखें न हों कुछ भी पारदर्शी नहीं है।
  • जोश के बिना शिखर कभी नहीं आता।
  • आत्म-छवि व्यक्ति की सीमाओं को निर्धारित करती है।
  • सौहार्द के बिना टीम नहीं बन सकती। जहां सौहार्द है वह टीम अवश्य ही जीतती है।
  • सुनिश्चित सफलता के लिए बड़ा प्रस्ताव, अंग्रेजी के शब्द बॉस का विस्तार है। 

रविवार, 28 अगस्त 2011

अन्ना हजारे होने के मायने

आज देश ने अन्ना हजारे को जितना प्यार और स्नेह दिया है,उतना देश की जनता ने शायद ही किसी ओर को दिया हो।अन्ना में ऐसा क्या है?जो उन्हें हमारे तथाकथित नेताओं से अलग करता है।पिछले बारह दिनों में अन्ना को मैंने जितना सुना,देखा और समझा है; उसके अनुसार अन्ना में अग्रलिखित गुण पाएं हैं:

1.कथनी और करनी में एकरूपता:: अन्ना हजारे हमारे समय के एक ऐसे युगपुरुष के रूप में उभरे हैं जिनकी कथनी और करनी एक है।वे जो बोले उस पर अडिग रहे।उनके हृदय की सरलता देखते ही बनती है।वे जो बोलते हैं,उसी के अनुरूप उनका कर्म है। दोहरापन या कूटनीति उनमें लेश मात्र भी नहीं है।वे विशुद्ध रूप से खरा सोना हैं।जिन्हें देश की जनता और युवा शक्ति पर पुरा भरोसा है।

2. निरहंकारिता: अन्ना जी में अहंकार और झूठे घमंड का तनिक भी दर्शन नहीं हुआ। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो आंदोलन खड़ा किया,उसमें उनके हृदय की विशालता और इस निरंहकारिता का बहुत बड़ा योग है। देश में पहली बार ऐसा हुआ,जब किसी गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति ने देश को अपने साथ जोड़ा और इस पर उन्हें किसी प्रकार का गर्व या अहंकार किंचित भी न छू सका।सचमुच अन्ना एक संत छवि के व्यक्तित्व के रूप में उभरे हैं।

3. सत्य और सादगी का अनुपम उदाहरण : अन्ना जी का जीवन सत्य को समर्पित दिखाई पड़ता है।वे सत्य के लिए और आम आदमी के हकों के लिए लड़ते हुए दिखाई देते हैं। उनके सरल और सादगी भरे जीवन में सत्य प्रतिबिंबित हो उठा है। लोगों को पहली बार अहसास हुआ है कि व्यवस्था से झूठ और भ्रष्ट आचरण को दूर किया जा सकता है। पूरा देश उनके इस आंदोलन में उनके साथ जुड़ा और जनलोकपाल बिल को सरकार की कुजिद्द के बावजूद संसद में चर्चा के लिए रखना पड़ा और सांसदों ने इसके पक्ष में ध्वनिमत दिया।यह सत्य की असत्य पर जीत है। अन्ना जी ने भारत के सद्य-स्नात इस नारे को नये अर्थ दिए हैं कि सत्य की सदैव विजय होती है- सत्यमेव जयते। अन्ना ने भ्रष्टाचार के अंधकार से निकलने के लिए प्रकाश की एक ज्योत जलाई है।अन्ना ने असत्य से सत्य की ओर चलने का इस कलयुग में एक मार्ग दिखाया है।

4. दृढ़ता: अन्ना के व्यक्तित्व की एक अन्य विशेषता जो हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है:वह है उनकी अडिगता या संकल्प की दृढ़ता। उन्होंने हमें इस बात की सीख दी है कि अपने हृदय की आवाज़ सुनों और उसके अनुसार आचरण करो तथा कभी हृदय से निकली आवाज से डिगो नहीं। उस पर दृढ़ रहो। उसके लिए संघर्ष करो।उन्होंने आज यह बात साबित कर दी है कि सत्य के पथ पर चलने वाले लोग कभी अकेले नहीं पड़ते,,,लोग उनके साथ आ खड़े होते हैं और कुछ समय पहले तक जब यह समझा जा रहा था कि व्यवस्था को बदला नहीं जा सकता...व्यवस्था से भ्रष्टाचार को खतम नहीं किया जा सकता और देश से भ्रष्ट नेताओं के तंत्र को समाप्त नहीं किया जा सकता।इन सब बातों को अन्ना ने अपनी दृढ़ता से परास्त किया है। और लोगों में एक विश्वास पैदा हुआ है कि व्यवस्था से भ्रष्टाचार को हटाया जा सकता है यदि उद्देश्य नेक हो।

5. अहिंसा और देश-भक्ति की भावना: अन्ना एक सच्चे गांधीवादी हैं। आज गांधी यदि किसी रूप में जिंदा हैं तो वे अन्ना के रूप में हमारे सामने खड़े हैं। जिस पार्टी को गांधी ने खड़ा किया था...उसी पार्टी ने गांधी के विचारों और आदर्शों को स्वतंत्रता के बाद तिलांजलि दे दी और उन्हें भुला बैठी ...आज उसी पार्टी के लोग गांधी के रास्ते पर चलने वाले अन्ना के अनशन,अहिंसा और सत्य के मार्ग को धता बता रहें हैं...जबकि दूसरी ओर देश के एक छोटे से गाँव से उठे 74 वर्षीय अन्ना के जीवन में गांधी के आदर्श और विचार कूट-कूट कर भरें हैं। उन्होंने न केवल हमारे देश को बल्कि पूरे संसार को यह जता दिया है कि गांधी के आदर्श और विचार आज भी व्यवहारिक और समसामयिक हैं। उन्होंने देश के लोगों में देश-भक्ति की भावना का संचार किया है। उन्होंने हमारे युवाओं में देश-भावना का जज्बा फूंका है।

6. संयम और धैर्य:: अन्ना जी के पास संयम और धैर्य का असीम बल है।अन्ना ने अपने पूरे आंदोलन में कहीं भी संयम और धैर्य नहीं खोया।उन्हें अपने अंतस पर पूरा भरोसा है। उनका व्यक्तित्व कहीं भी बंटा हुआ नजर नहीं आया। उन्होंने अपनी वाणी पर पूरा नियंत्रण रखा है और विषम से विषम परिस्थिति में धैर्य के साथ बहुत ही विवेक से आचरण किया है। उनकी इस धीरता,गंभीरता और संयम ने उन्हें संत की श्रेणी में खड़ा कर दिया है।

7.विवेकशीलता:: अन्ना ने हर परिस्थिति में जो विवेक और समझदारी दिखाई है और उनसे जो निकला है...वह अकल्पनीय और स्वर्गीक अनुभव जैसा है। सरकार ने उन्हें अपने पथ से विचलित करने के लिए येन-केन-प्रकारेण,साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपनाई...लेकिन उन्हें किंचित भी विचलित नहीं कर सकी और सरकार के पास अन्ना के प्रश्नों और मुद्दों का कोई तोड़ नजर नहीं आया। अन्ना जब भी बोले तो लगा कि अन्ना की बात में जितना दम है...सरकार के तर्कों में उसका एक प्रतिशत भी नहीं है। अन्ना के विवेक के सम्मुख सरकार निरुत्तर हो गई। 

सत्य  और भ्रष्टाचार के लिए लड़ने वाले इस योद्धा को हमारा शत-शत नमन है। अन्ना तुझे सलाम!!! 


गुरुवार, 25 अगस्त 2011

मेरी सेवानिवृत्ति

एक दिन मैं भी
ऐसे ही सेवानिवृत्त हो
कर
जाउंगा कार्यालय से

लोग अनमने मन से
मुझे भी कुछ हार पहनाएंगे
थोड़े मेरी प्रशंसा में
वे शब्द कहेंगे
जिनमें न रस होगा
न ताज़गी
और फिर खाने-पीने
का दौर शुरु हो जाएगा

तब मैं घर लौट आऊंगा
और लोग धीरे-धीरे
मुझे भूल जाएंगें
कार्यालय वैसे ही चलता
रहेगा
जैसे आज चलता है
बस मैं न रहूंगा
न मेरे हस्ताक्षर होंगे
0
0
0
होगा एक विराट शून्य
जिसमें धीरे-धीरे
सब समा जाएगा
और अस्तित्व अपनी
एक महायात्रा पूरी
कर चुका होगा


रविवार, 14 अगस्त 2011

दोस्ती और शेयरिंग

आज एक दृष्टांत प्रस्तुत कर रहा हूँ; दोस्ती और दोस्ती में अपेक्षाओं का। दोस्त अक्सर परस्पर एक-दूसरे के साथ अपने विचारों का आदान-प्रदान करते हैं। एक दूसरे के सुख-दुख में शामिल होते हैं और इन्हें आपस में बांट कर सांझा करते हैं। लेकिन दोस्ती में क्या जरुरी है कि दोस्त की हर अपेक्षा को पूरा किया जाए??? 

एक बार मेरे किसी मित्र ने ई-मेल मेल से मुझे कुछ फोटोग्राफ़ भेजे। उन्होंने जो चित्र मुझे भेजे,वे तकनीकी कारणों से मेरी मेल पर खुले नहीं। मैंने उन्हें,प्रत्युत्तर भेजा कि आपने जो फोटोग्राफ़ भेजे थे,वे खुल नहीं पा रहे हैं? कृपया इन्हें पुन:भेज दें। मित्र ने मुझ से मेरे ई-मेल का पॉस-वर्ड पूछा। मैंने उन्हें पासवर्ड नहीं दिया।इस बात को लेकर मित्र मुझ से नाराज़ हो गए। और उन्हें लगा कि मैं उन्हें मित्र नहीं मानता। मित्र मानता तो पॉसवर्ड देता? इसके बाद हमारे बीच में दूरियाँ बढ़ गई,जिन्हें मैं चाह कर भी खतम नहीं कर सका। क्या किसी मित्र को अपनी इस तरह की निजी और गोपनीय बातें भी बतानी चाहिएं??? 

कृपया पाठक गण अपनी राय व्यक्त कर मेरी समस्या का समाधान करें।

शुक्रवार, 5 अगस्त 2011

समाज और सत्य

"समाज में रहने के लिए'सत्य' जैसे खुले आकाश की नहीं; बल्कि बंद,अंधेरे कमरे जैसे 'झूठ' की ज्यादा जरूरत रहती है।" _मनोज भारती