रविवार, 28 अगस्त 2011

अन्ना हजारे होने के मायने

आज देश ने अन्ना हजारे को जितना प्यार और स्नेह दिया है,उतना देश की जनता ने शायद ही किसी ओर को दिया हो।अन्ना में ऐसा क्या है?जो उन्हें हमारे तथाकथित नेताओं से अलग करता है।पिछले बारह दिनों में अन्ना को मैंने जितना सुना,देखा और समझा है; उसके अनुसार अन्ना में अग्रलिखित गुण पाएं हैं:

1.कथनी और करनी में एकरूपता:: अन्ना हजारे हमारे समय के एक ऐसे युगपुरुष के रूप में उभरे हैं जिनकी कथनी और करनी एक है।वे जो बोले उस पर अडिग रहे।उनके हृदय की सरलता देखते ही बनती है।वे जो बोलते हैं,उसी के अनुरूप उनका कर्म है। दोहरापन या कूटनीति उनमें लेश मात्र भी नहीं है।वे विशुद्ध रूप से खरा सोना हैं।जिन्हें देश की जनता और युवा शक्ति पर पुरा भरोसा है।

2. निरहंकारिता: अन्ना जी में अहंकार और झूठे घमंड का तनिक भी दर्शन नहीं हुआ। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ जो आंदोलन खड़ा किया,उसमें उनके हृदय की विशालता और इस निरंहकारिता का बहुत बड़ा योग है। देश में पहली बार ऐसा हुआ,जब किसी गैर-राजनीतिक पृष्ठभूमि के व्यक्ति ने देश को अपने साथ जोड़ा और इस पर उन्हें किसी प्रकार का गर्व या अहंकार किंचित भी न छू सका।सचमुच अन्ना एक संत छवि के व्यक्तित्व के रूप में उभरे हैं।

3. सत्य और सादगी का अनुपम उदाहरण : अन्ना जी का जीवन सत्य को समर्पित दिखाई पड़ता है।वे सत्य के लिए और आम आदमी के हकों के लिए लड़ते हुए दिखाई देते हैं। उनके सरल और सादगी भरे जीवन में सत्य प्रतिबिंबित हो उठा है। लोगों को पहली बार अहसास हुआ है कि व्यवस्था से झूठ और भ्रष्ट आचरण को दूर किया जा सकता है। पूरा देश उनके इस आंदोलन में उनके साथ जुड़ा और जनलोकपाल बिल को सरकार की कुजिद्द के बावजूद संसद में चर्चा के लिए रखना पड़ा और सांसदों ने इसके पक्ष में ध्वनिमत दिया।यह सत्य की असत्य पर जीत है। अन्ना जी ने भारत के सद्य-स्नात इस नारे को नये अर्थ दिए हैं कि सत्य की सदैव विजय होती है- सत्यमेव जयते। अन्ना ने भ्रष्टाचार के अंधकार से निकलने के लिए प्रकाश की एक ज्योत जलाई है।अन्ना ने असत्य से सत्य की ओर चलने का इस कलयुग में एक मार्ग दिखाया है।

4. दृढ़ता: अन्ना के व्यक्तित्व की एक अन्य विशेषता जो हमारे लिए प्रेरणा का स्रोत है:वह है उनकी अडिगता या संकल्प की दृढ़ता। उन्होंने हमें इस बात की सीख दी है कि अपने हृदय की आवाज़ सुनों और उसके अनुसार आचरण करो तथा कभी हृदय से निकली आवाज से डिगो नहीं। उस पर दृढ़ रहो। उसके लिए संघर्ष करो।उन्होंने आज यह बात साबित कर दी है कि सत्य के पथ पर चलने वाले लोग कभी अकेले नहीं पड़ते,,,लोग उनके साथ आ खड़े होते हैं और कुछ समय पहले तक जब यह समझा जा रहा था कि व्यवस्था को बदला नहीं जा सकता...व्यवस्था से भ्रष्टाचार को खतम नहीं किया जा सकता और देश से भ्रष्ट नेताओं के तंत्र को समाप्त नहीं किया जा सकता।इन सब बातों को अन्ना ने अपनी दृढ़ता से परास्त किया है। और लोगों में एक विश्वास पैदा हुआ है कि व्यवस्था से भ्रष्टाचार को हटाया जा सकता है यदि उद्देश्य नेक हो।

5. अहिंसा और देश-भक्ति की भावना: अन्ना एक सच्चे गांधीवादी हैं। आज गांधी यदि किसी रूप में जिंदा हैं तो वे अन्ना के रूप में हमारे सामने खड़े हैं। जिस पार्टी को गांधी ने खड़ा किया था...उसी पार्टी ने गांधी के विचारों और आदर्शों को स्वतंत्रता के बाद तिलांजलि दे दी और उन्हें भुला बैठी ...आज उसी पार्टी के लोग गांधी के रास्ते पर चलने वाले अन्ना के अनशन,अहिंसा और सत्य के मार्ग को धता बता रहें हैं...जबकि दूसरी ओर देश के एक छोटे से गाँव से उठे 74 वर्षीय अन्ना के जीवन में गांधी के आदर्श और विचार कूट-कूट कर भरें हैं। उन्होंने न केवल हमारे देश को बल्कि पूरे संसार को यह जता दिया है कि गांधी के आदर्श और विचार आज भी व्यवहारिक और समसामयिक हैं। उन्होंने देश के लोगों में देश-भक्ति की भावना का संचार किया है। उन्होंने हमारे युवाओं में देश-भावना का जज्बा फूंका है।

6. संयम और धैर्य:: अन्ना जी के पास संयम और धैर्य का असीम बल है।अन्ना ने अपने पूरे आंदोलन में कहीं भी संयम और धैर्य नहीं खोया।उन्हें अपने अंतस पर पूरा भरोसा है। उनका व्यक्तित्व कहीं भी बंटा हुआ नजर नहीं आया। उन्होंने अपनी वाणी पर पूरा नियंत्रण रखा है और विषम से विषम परिस्थिति में धैर्य के साथ बहुत ही विवेक से आचरण किया है। उनकी इस धीरता,गंभीरता और संयम ने उन्हें संत की श्रेणी में खड़ा कर दिया है।

7.विवेकशीलता:: अन्ना ने हर परिस्थिति में जो विवेक और समझदारी दिखाई है और उनसे जो निकला है...वह अकल्पनीय और स्वर्गीक अनुभव जैसा है। सरकार ने उन्हें अपने पथ से विचलित करने के लिए येन-केन-प्रकारेण,साम-दाम-दंड-भेद की नीति अपनाई...लेकिन उन्हें किंचित भी विचलित नहीं कर सकी और सरकार के पास अन्ना के प्रश्नों और मुद्दों का कोई तोड़ नजर नहीं आया। अन्ना जब भी बोले तो लगा कि अन्ना की बात में जितना दम है...सरकार के तर्कों में उसका एक प्रतिशत भी नहीं है। अन्ना के विवेक के सम्मुख सरकार निरुत्तर हो गई। 

सत्य  और भ्रष्टाचार के लिए लड़ने वाले इस योद्धा को हमारा शत-शत नमन है। अन्ना तुझे सलाम!!! 


4 टिप्‍पणियां:

  1. Aapke ise bhavpoorn aur sarthak lekh ko naman .
    Lagta hai saara desh hee ek lambee moorcha se jag
    chetanavastha me aaya hai.
    yuva varg v aam aadmee me ye housala bana rahe aisee duaa hai.
    common man ka kad ab meree nazaro me bahut lamba ho gaya hai.
    Aabhar .

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  2. अन्ना के जिन सद्गुणों का आपने वर्णन किया है, वे गुण ही उन्हें अन्य "नेताओं" से अलग करते हैं और उनको युगपुरुष बनाते हैं.. आज एक बहुत पुराने गीत की पैरोडी बनाने को जी चाहता है:
    भगवान करे मेरे देश के सब नेता ही बन जाएँ ऐसे,
    थोड़े से लाल बहादुर हों, थोड़े से हों अन्ना जैसे!

    मनोज भाई, आभार आपका इतने गहरे विश्लेषण का!!

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  3. निसंदेह अन्ना जी अद्वितीय गुणों की खान हैं। यही वजह है उन्हें इतना प्यार और समर्थन मिला। ऐसे व्यक्तित्व को नमन।

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