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चित्त की झील में तूफान

सुबह-सुबह एक झील के किनारे से नौका छूटी। कुछ लोग उस पर सवार थे। नौका ने झील में थोड़ा ही प्रवेश किया होगा कि जोर का तूफान आ गया और बादल घिर आए। नौका डगमगाने लगी। आज की नौका नहीं थी,दो हजार वर्ष पहले की थी। उसके डूबने का डर पैदा हो गया। जितने लोग उस नौका पर थे,सारे लोग घबरा गए। प्राणों का संकट खड़ा हो गया। लेकिन उस समय भी उस नौका पर एक आदमी शांत सोया हुआ था। उन सारे लोगों ने जाकर उस आदमी को जगाया और कहा कि क्या सो रहे हो और कैसे शांत बने हो!!!प्राण संकट में हैं,मृत्यु निकट है और नौका बचने की कोई उम्मीद नहीं है। तूफान बड़ा है और दोनों किनारे दूर हैं।  उस शांत सोए हुए व्यक्ति ने आंखें खोली और कहा--कितने कम विश्वास के तुम लोग हो,कितनी कम श्रद्धा है तुममें। कहो झील से कि शांत हो जाए। वे लोग हैरान हुए कि झील किसी के कहने से शांत होती है! यह कैसी पागलपन की बात है! लेकिन वह शांत सोया हुआ आदमी उठा और झील के पास गया और उसने जाकर झील से कहा,झील! शांत हो जाओ! और आश्चर्यों का आश्चर्य कि झील शांत हो गई।  यह आदमी जीसस क्राइस्ट था और झील गैलीली झील थी और उनके साथ दस-बारह मित्र थे। य...