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सेवानिवृत्त होने पर कैसे समायोजन करें?

सेवानिवृत्त होने पर कैसे समायोजन करें?


जीवन का उतार होते हुए भी हम सेवानिवृत्ति की खुशियों को देखते हैं,सेवानिवृत्त होना जीवन का एक महत्वपूर्ण परिवर्तन है। शोध बताता है कि बहुत से लोग संक्रमण के दौरान संघर्ष करते हैं। आप अपनी जिंदगी में क्या करें कि इस बदलाव को सकारात्मक बनाया जा सके?
सेवानिवृत्ति को एक महत्वपूर्ण जीवन परिवर्तन के रूप में जानें। हम सेवानिवृत्ति के बारे में, इसके स्वप्नलोक के बारे में बहुत कुछ सुनते हैं कि बहुत से लोग दिन प्रति दिन की जिंदगी के लिए तैयार नहीं होते। पहली चीज जो आप को समझनी है वह यह है कि सेवानिवृत्ति कोई बढ़ाई गई छुटी नहीं है। यदि आप मानसिक तौर पर सेवानिवृत्ति को एक महत्वपूर्ण परिवर्तन के रूप में लेते हुए प्रयास करते हैं तो समायोजन आसान होगा।
खाली रहने और काम करने के बीच में संतुलन बनाइए। यदि आपकी जिंदगी तनाव और व्यस्त कामों से भरी हुई है,तो ऐसे में वह दो अतियों के बीच डोलने की प्रवृत्ति अपना लेती है, या तो बहुत अ‍धिक काम या फिर कुछ भी नहीं करना। दोनों के बीच में संतुलन को साधो। सुनिश्चित करें कि आप इतने व्यस्त न हों कि आपके पास थोड़ा समय भी न हो। यह आपके मस्तिष्क और शरीर के लिए महत्वपूर्ण है कि उन्हें कुछ समय के लिए विराम का अवसर मिल सके,लेकिन यह विराम इस हद तक न हो कि वह अवनति बन जाए।
जिम्मेदारियों के साथ आमोद-प्रमोद ही संतुलन है। एक अति पर नए सेवानिवृत्तक, किए जाने वाले कार्यों की सूची बनाते हैं,जिन्हें वे लम्बे समय से स्थगित करते आ रहे थे। शौचालय की सफाई करना,घर की रंगाई-पुताई करना जैसे रोके गए कार्य ही अब उनका रोजगार हो गया। दूसरी तरफ, कुछ लोग अधोगामी फुरसत की ओर अपने जीवन को मोड़ देना शुरु करते हैं,जैसे एक खेल के बाद कोई दूसरा और खेल खेलना। एक अच्छा सेवानिवृत्तिक न तो सारा समय कामों को निपटाने में लगाता है और न ही खेल खेलने में। कार्यों को पूरा करने के लिए समय निकालना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि आराम और खेल गतिविधियों के लिए। कार्य व खेल की सही संतुलित स्वास्थ्यप्रद खुराक ही सर्वोत्तम सेवानिवृत्ति का जीवन सृजित करती है।
  “जब अंधेरा हो तो उस पर झलाइए नहीं, बल्कि एक दीपक जलाइए।“ -अ‍ल गोरे 
दिनचर्या बनाइए : जिसे आपने करना चाहा उसे तभी कर लेने की क्षमता होना ही आदर्श सेवानिवृत्ति है। सम्मानित सेवानिवृत्ति के लिए अभी से दिनचर्या बनाना शुरु कर दीजिए। आपको प्रयोग करना है और कुछ आदर्श प्रतिमानों(पैटर्नस)को चुनना है,जिसके बदले में आप आप पाएंगे कि आपके पास आपके द्वारा किए जाने वाले कार्यों के लिए अधिक समय है और आप उन कार्यों को तभी कर पाने में सक्षम हैं जब आपने उन्हें करना चाहा और यह तभी होगा जब आप शुरु से ही अपनी दैनिक चर्या बना कर चलेंगे।
सहयोग और संबंधों को पहचानिए : सेवानिवृत्ति पर कार्यालयी कार्यों से अचानक संबंध टूट जाने से बहुत से लोगों को आघात पहुंच सकता है। यदि आपका जीवन-साथी अभी भी सेवा में है और परिवार तथा मित्र अपनी थका देने वाली जिंदगी में व्यस्त हैं तो नव-सेवानिवृत्तियों को अचानक अहसास होने लगता है कि वे अकेले और दूसरों से कटे हुए हैं। इस प्रवृत्ति से बचने के लिए सम-मानसिकता वाले मित्रों का समूह तैयार कीजिए।
तुरंत स्वास्थ्यप्रद प्रतिमान स्थापित करें :सेवा में रहते हुए समय की कमी रहते यदि आपने व्यायाम नहीं किया और सही ढंग से भोजन नहीं लिया तो अब सेवानिवृत्ति के तुरंत बाद इनके लिए अच्छी आदतों का विकास कीजिए। सुनिश्चित कीजिए कि आप कुछ समय के लिए बाहर निकलें और किसी प्रकार का व्यायाम करें। अपने भोजन की आदतों पर गौर करें और निश्चित करें कि क्या वे सर्वोत्तम रूप से चयनित हैं। यदि नहीं, तो अभी से स्वास्थ्यप्रद भोजन लेना शुरु कीजिए।
सीखने के लिए कुछ नया खोजिए : शरीर की ही तरह अपने मस्तिष्क को सक्रिय और मननशील रखना सेवानिवृत्तियों के लिए सफल बदलाव हेतु सर्वोपरि है। कुछ समूहों के सदस्य बन जाइए,पुस्तकें पढ़िए और कुछ खेल खेलिए। यदि आपके कोई शौक नहीं हैं तो थोड़ा समय निकाल कर नई रुचियां विकसित कीजिए। आपके लिए अनेक अलग-अलग क्रिया-प्रक्रिया हैं,जिनको आप आजमा सकते हैं। लेकिन सीखने की प्रक्रिया का आनंद लें और देखें कि आपकी रुचि अनुरूप क्या मेल रखता है।
अत्यधिक आराम पसंद मत बनिए : नई चुनौतियां और जोखिम लेना सीखिए। मनुष्य सर्वाधिक रूप से तब जीवंत अनुभव करता है जबकि वह अपने आरामदायक क्षेत्र से बाहर निकल कर कार्य करता है। इसका यह मतलब नहीं है कि आप स्वयं को खतरे में डालें,बल्कि इसका अर्थ है कि आप अपना विस्तार(आकाश) खोजें। नए लोगों से मिलिए,स्वयंसेवक बनो,नया खेल या नए शौक को अपनाएं। यदि आप कुछ नया करने के लिए अनिच्छुक हैं क्योंकि आप वहां स्वयं को सहज महसूस नहीं कर पा रहे, तो जाने कि वह क्या कारण है जो आपको असहज कर रहा है। शिकायत का भाव सबसे बुरा चुनाव है,जो आप सेवानिवृत्त होने पर सबसे पहले करते हो।
“जब एक व्यक्ति सेवानिवृत्त होता है तो उसकी पत्नी दूसरी बार अपने पति को पूरा पाती है,लेकिन आय आधी ही।“ -ची ची रोड्रिगुएज 
सेवानिवृत्ति जीवन का महत्वपूर्ण बदलाव है। यह जीवन का सर्वाधिक सम्माननीय समय हो सकता है,यदि इन सुझावों का पालन किया जाए। आप जैसी जिंदगी जीना चाहते हैं, उसी तरह की जिंदगी का विकास आपके हाथ में है।
लेख स्रोत : http://EzineArticles.com

“आप सोचते हैं कि आपही समस्या हैं,लेकिन वस्तुत: आप समाधान हैं। आप सोचते हैं कि आप दरवाजे पर लगे बंद ताले हो,लेकिन वस्तुत: आप वह चाबी हैं,जो इस ताले को खोल सकती है।“ - जलालुद्दीन रुमी,सूफी कवि (1207-1273)

अ‍नुवाद: मनोज भारती 

टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति.. आपको सूचित करते हुए हर्ष हो रहा है कि आपकी पोस्ट हिंदी ब्लॉग समूह में सामिल की गयी और आप की इस प्रविष्टि की चर्चा कल - रविवार - 29/09/2013 को
    क्या बदला?
    - हिंदी ब्लॉग समूह चर्चा-अंकः25
    पर लिंक की गयी है , ताकि अधिक से अधिक लोग आपकी रचना पढ़ सकें . कृपया पधारें, सादर .... Darshan jangra


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