गुरुवार, 30 दिसंबर 2010

हँसता हुआ बुद्ध

जब से भारत में चॉईनीज़ बाजार का जोर पकड़ा है, भारत में चॉईनीज़ वास्तु, फेंग्सुई, विंड चॉईम के साथ-साथ हँसते हुए बुद्ध यानी लॉफिंग बुद्धा भी बहुत प्रचारित हो गए हैं । हँसते हुए मुख, थुलथुल शरीर और पीठ पर बड़ी सी पोटली को लटकाए इस लॉफ़िंग बुद्धा की मूर्ति आजकल भारत के हर तीसरे घर और बाजार में गिफ्ट शॉपस पर दिखाई पड़ जाती है । जो समृद्धि व खुशहाली का प्रतीक है । 

बहुत कम लोग जानते हैं कि लॉफिंग बुद्धा वास्तव में कौन हैं । वस्तुत: वह एक झेन साधक था । जिसका जन्म चीन के ताँग साम्राज्य में हुआ  और जिसका वास्तविक नाम होतेई था । लेकिन उसमें गुरु होने की जरा भी इच्छा न थी । वह नहीं चाहता था कि वह किसी आश्रम में रहे और चेले बनाए । वह तो एक बड़ी सी पोटली पीठ पर लादे, गलियों में यायावर की तरह घूमता रहता । उसकी इस पोटली में सूखे-मेवे, टॉफियाँ, फल आदि भरे रहते थे । वह इन्हें उपहार स्वरूप उन बच्चों में बाँटता रहता था, जो खेल-खेल में उसके चारों ओर इकट्ठा हो जाते थे । यह कृत्य कुछ-कुछ सैंटा से मिलता-जुलता है ।

होतेई जब भी किसी झेन साधक से मिलता, तो अपना हाथ पसार कर एक पेनी देने का अनुरोध करता । एक बार होतेई बच्चों से घिरा अपने खेल में मग्न था कि तभी एक झेन-गुरु उधर आ धमके । उन्होंने होतेई से पूछा, "बताओ झेन का क्या महत्त्व है ? "

होतेई ने अपनी पोटली उतार कर जमीन पर रख दी ।
"और उसका अमल ?"  झेन गुरु ने दूसरा सवाल दागा । 
समृद्ध होतेई ने अपनी पोटली उठा कर पीठ पर रखी और हँसते-हँसते अपने रास्ते चल पड़ा । 

इस कथा में झेन का संपूर्ण सार-तत्व आ गया है ।

5 टिप्‍पणियां:

  1. महाप्रभु बोझ उतारने और वहन करने के बीच की पूरी यात्रा समझा दी!!

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  2. भई वाह सार्थक संदेश. नववर्ष की ढेरों हार्दिक शुभभावनाएँ.

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  3. Bahut hi dilchsp post ,main aabhari hoon jo hame aesi sundar jaankari di aapne .nav barsh ki badhiyaan .

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  4. मनोज जी ,
    इस बेहतरीन जानकारी के लिए आभार।
    नव वर्ष मंगलमय हो।

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