मंगलवार, 24 जनवरी 2012

पुस्तकें

पुस्तकें आप की अक्षय जीवन संगिनी हैं।यदि आपके पास पुस्तकें हैं तो आपके पास बुद्धिमता,हर्ष,विद्वता,चतुरता,विवेक,ज्ञान और तत्त्वज्ञान का झरना है।इनके द्वारा आप शताब्दियों के सर्वोत्तम विचारकों का सत्संग कर सकते हैं और जब भी आपकी इच्छा हो इनसे लाभ उठा सकते हैं। पुस्तकें मन को आलोकित करती हैं,प्राण को सबल बनाती हैं,क्लांत शरीर को उठाती हैं और जीवन भर साथ बनी रहती हैं।-टी.पी.डून्न

7 टिप्‍पणियां:

  1. सही है मनोज जी! पुस्तकों के बिना मस्तिष्क वातायन विहीन गृह-सदृश होता है!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. चला बिहारी से सहमत ....ब्लोग भी अब किताब को पन्ना पन्ना पढनें जैसा है।

    उत्तर देंहटाएं
  3. चैतन्य जी!!!निश्चित ही ब्लॉग पढ़ना किताब जैसा ही है...लेकिन किताब के साथ जो निकटता और पढ़ने की सहूलियत होती है...उतनी ब्लॉग में अभी संभव नहीं हो पायी है...हां ब्लॉग लेखक से जरूर निकटता होती है।

    उत्तर देंहटाएं
  4. पुस्तकों से बढ़ कर कोई मित्र नहीं. सुंदर पोस्ट.

    उत्तर देंहटाएं
  5. मनोज जी , बिलकुल सहमत. पुस्तकें , खासकर साहित्यिक पुस्तकें पड़ना मेरी तो हमेशा से है पसंद रहीं है.

    उत्तर देंहटाएं