रविवार, 21 नवंबर 2010

अवधान

हम दैनिक जीवन में कितने चेतनशील जीते हैं, दैनिक जीवन के कामों को करते हुए कितने चेतनशील होते हैं ? इस चेतनशीलता को विकसित करना ही झेन का आधार है । झेन साधक इस चेतनशील जीवन को साधने के लिए झेन गुरु के सान्निध्य में शिक्षा लेते हैं । कम से कम दो वर्ष । झेन गुरु नान-इन के पास इस हेतु एक टेन्नो नाम का साधक शिक्षा ग्रहण करता था । शिक्षा पूरी होने पर टेन्नो अपने गुरु से मिलने गया । वर्षा का मौसम था । टेन्नो खड़ाऊ पहने था और छाता साथ में लिए हुए था । गुरु के निवास स्थान में प्रवेश करने से पूर्व उसने अपने खड़ाऊ और छाता बाहर अहाते में रखे और कुटिया में प्रवेश किया । नान-इन ने टेन्नो का स्वागत किया और उसकी ओर गौर से देखते हुए पूछा, मेरा ख्याल है, तुम अपने खड़ाऊ अहाते में छोड़ कर आए हो । मैं यह जानना चाहता हूँ कि तुम्हारा छाता तुम्हारे खड़ाऊ के दायीं तरफ रखा है या बायीं तरफ ? 

टेन्नो उलझन में था । वह यह कार्य करते हुए सजग न था । उसे तत्काल कोई जवाब न सूझा । उसे एहसास हुआ कि जिस ध्यान की शिक्षा वह ग्रहण कर चुका है, वह पूरी नहीं हुई है और वह सजग जीवन जीने में सफल नहीं हुआ है । इसे पूरा करने के लिए उसे कुछ समय और गुरु के सान्निध्य में रहना होगा । 

3 टिप्‍पणियां:

  1. बढ़िया पोस्ट प्रेरणा देने वाली.

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  2. मनोज जी! इसी एकाग्रता की बात शर्लॉक होम्स करते थे! एक पैनी नज़र और उसको देखने का अलग अंदाज़.ग्रह नक्षत्रों और सौर म्ण्डल का ज्ञान न था, किंतु जूतों पर लगी मिट्टी देखकर बता सकते थे कि आप प्रदेश या देश के किस हिस्से से आ रहे हैं.. बहुत ही प्रेरक प्रसंग!!

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