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ओशो की डायरी से :2:
- यह मत कहो कि मैं प्रार्थना में था,क्योंकि उसका अर्थ है कि आप प्रार्थना के बाहर भी होते हो। जो प्रार्थना के बाहर भी होता है,वह प्रार्थना में नहीं हो सकता। प्रार्थना क्रिया नहीं है। प्रार्थना तो प्रेम की परिपूर्णता है।
- जीवन की खोज में आत्मतुष्टि से घातक और कुछ नहीं। जो स्वयं से संतुष्ट हैं,वे एक अर्थ में जीवित ही नहीं हैं। स्वयं से जो असंतुष्ट है,वही सत्य की दिशा में गति करता है। स्मरण रखना कि आत्मतुष्टि से निरंतर ही विद्रोह में होना धार्मिक होना है।
- मृत्यु से घबड़ाकर तो आपने ईश्वर का आविष्कार नहीं कर लिया है? भय पर आधारित ईश्वर से असत्य और कुछ भी नहीं है।
- जो सदा वर्तमान है,वही सत्य है। निकटतम जो है,वही अंतिम सत्य है। दूर को नहीं,निकट को जानों क्योंकि जो निकट को ही नहीं जानता है, वह दूर को कैसे जानेगा? और जो निकट को जान लेता है,उनके लिए दूर शेष नहीं रह जाता है।
- मैं कौन हूँ? पूछो- स्वयं से। मैं कहां हूँ? खोजो- स्वयं में।जब तुम कहीं भी स्वयं को नहीं पा सकोगे तो जान जावोगे कि तुम कौन हो। मैं की अनुपलब्धि में ही मैं का रहस्य छिपा हुआ है।
- सत्य यदि ज्ञात नहीं है,तो शास्त्र व्यर्थ है और यदि सत्य ज्ञात है तो भी शास्त्र व्यर्थ है।
- सत्य की जिज्ञासा कर रहे हो और मन पर धूल इकट्ठी करते जाते हो? मन तो दर्पण की भांति है। इसे साफ करो और तुम पाओगे कि सत्य समक्ष है- और सदा से ही समक्ष है।
- एक भ्रम को मिटाने के लिए दूसरा भ्रम पैदा मत करो। एक स्वप्न तोड़ने को दूसरे स्वप्न में जाना उचित नहीं है। ईश्वर की कल्पना मत करो-सब कल्पनाएँ छोड़कर देखो। जो समक्ष पाओगे वही ईश्वर है।
- मैं नदी में स्नान करने जाता हूँ तो वस्त्र तट पर छोड़ देने होते हैं। परमात्मा में स्नान करने की जिसकी अभीप्सा है,उसे भी अपने सारे वस्त्र तट पर ही छोड़ने होंगे-सारे वस्त्र,सारे ओढ़े हुए व्यक्तित्व। उस परम सागर में तो केवल वे ही प्रवेश पाते हैं,जो कि बिलकुल ही नग्न हैं- जिसके पास अब छोड़ने को कुछ भी शेष नहीं रहा है। किंतु धन्य हैं वे जो सब छोड़ सकते हैं क्योंकि इस भांति वे वह पा लेते हैं जो कि सब के जोड़ से भी अधिक है।
- शायद और सिद्धांत तो सूखे पत्तों की भांति हैं। स्वानुभूति की हरियाली न उनमें है, न हो सकती है। हरे पत्ते और जीवित फूल तो स्वयं के जीव-वृक्ष पर ही लगते हैं।
अभिभूत हूँ!! कभी जीवन में उतार सका इनको तो जीवन को धन्य मानूंगा!!
जवाब देंहटाएंAabharee hoo .
जवाब देंहटाएंBadee shantee anubhav hotee hai yanha ise blog par aakar aapkee post padkar .
मनोज जी , बहुत सुन्दर जीवन सूत्र मिले यहाँ - आभार।
जवाब देंहटाएंआपका हर पोस्ट बहुत अच्छा लगता है और पढ़कर आनंद मिलता है! इस सुन्दर पोस्ट के लिए धन्वयद!
जवाब देंहटाएंjeevan ko is amrit ras se sinchna jaroori hai ,aabhari hoon .
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