गुरुवार, 21 जुलाई 2011

चिंतन


  • संप्रदायों,पंथों में बंटा हुआ व्यक्ति सत्य को नहीं पहचान सकता।
  • व्यक्ति की वैयक्तिक सोच,जब तक सृजन में साकार नहीं होती,तब तक व्यक्ति की सोच वायवीय समझी जाती है।एक पागलपन।सृजन के लिए यह पागलपन,जुनून जरुरी है।
  • किसी चीज की वयुत्पत्ति के लिए दो विरोधी तत्त्वों का मिलन आवश्यक है।
  • दूसरों को धोखा देने से पहले,व्यक्ति स्वयं को धोखा देता है।

5 टिप्‍पणियां:

  1. .

    दूसरों को धोखा देने से पहले,व्यक्ति स्वयं को धोखा देता है।....

    बहुत गहरी बात ! ! दूसरों को धोखा देते समय हम स्वयं को ही धोखे में रख रहे होते हैं. !

    एक से बढ़कर एक अनमोल वचन !

    .

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  2. सटीक कहा है आपने! उत्तम विचार!
    मेरे नए पोस्ट पर आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com/
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