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ज्ञान गंगा :2

प्रेम क्या है ? प्रेम उस भाव-दशा का नाम है, जब विश्व सत्ता से पृथकत्व का भाव तिरोहित हो जाता है । समग्र की सत्ता में स्वयं की सत्ता का मिलन ही प्रेम है । यह सत्य है,क्योंकि वस्तुत: सत्ता एक ही है और जो भी है उसमें ही है । यह प्रेम प्रत्येक में सहज ही स्फूर्त होता है, लेकिन अज्ञान के कारण हम उसे राग में परिणत कर लेते हैं । प्रेम की स्फुर्णा को अहंकार पकड़ लेता है और वह स्वयं और समग्र की सत्ता के बीच सम्मिलन न होकर दो व्यक्तियों के बीच सीमित संबंध हो जाता है । असीम होकर जो प्रेम है, सीमित होकर वही राग है । राग बंधन बन जाता है, जबकि प्रेम मुक्ति है । असल में जहां सीमा है, वहीं बंधन है । राग का बुरा होना उसमें निहित प्रेम के कारण नहीं वरन् उस पर आरोपित सीमा के कारण है । राग असीम हो जाए तो वह प्रेम बन जाता है, विराग हो जाता है । ध्यान रखने की बात यही है कि प्रेम तो हो पर उसमें कोई सीमा न हो । जहां सीमा आने लगे वहीं सचेत हो जाना आवश्यक है । वही सीमा संसार है । इस भांति क्रमश: सीमाओं को तोड़ते हुए प्रेम की ऊर्जा का विस्तार ही साधना है । जिस घड़ी उस जगह पर पहुँचना हो जाता है, जहां सीमा नहीं है, तो जानना चाहिए कि परमात्मा पर पहुँचना हो गया । इसके विपरीत्त यदि प्रेम सीमित होता चला जाए और अंतत: अहम् अणु पर ही केद्रित हो जाए, तो जानना चाहिए कि परमात्मा से जितनी ज्यादा पृथकता हो सकती है, वह हो चुकी है । यह अवस्था राग की चरम अवस्था है, जो कि अत्यंत दुख, परतंत्रता और संताप को उत्पन्न करती है । इसके विपरीत्त प्रेम के असीम होने की चित्त दशा है, जो जीवन को अनंत आलोक और आनंद से परिपूरित कर देती है।
( यह लेख ओशो देशना पर आधारित है।)

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लिंकन अमेरिका का राष्ट्रपति हुआ । उसका बाप एक गरीब चमार था । कौन सोचता था कि चमार के घर एक लड़का पैदा होगा, जो मुल्क में आगे खड़ा हो जाएगा ? अनेक-अनेक लोगों के मन को चोट पहुँची । एक चमार का लड़का राष्ट्रपति बन जाए । दूसरे जो धनी थे और सौभाग्यशाली घरों में पैदा हुए थे, वे पिछड़ रहे थे । जिस दिन सीनेट में पहला दिन लिंकन बोलने खड़ा हुआ, तो किसी एक प्रतिस्पर्धी ने, किसी महत्वाकांक्षी ने, जिसका क्रोध प्रबल रहा होगा, जो सह नहीं सका होगा, वह खड़ा हो गया । उसने कहा, "सुनों लिंकन, यह मत भूल जाना कि तुम राष्ट्रपति हो गए तो तुम एक चमार के लड़के नहीं हो । नशे में मत आ जाना । तुम्हारा बाप एक चमार था, यह खयाल रखना ।" सारे लोग हँसे, लोगों ने खिल्ली उड़ाई, लोगों को आनंद आया कि चमार का लड़का राष्ट्रपति हो गया था । चमार का लड़का कह कर उन्होंने उसकी प्रतिभा छीन ली ।फिर नीचे खड़ा कर दिया । लेकिन लिंकन की आँखें  खुशी के आँशुओं से भर गई । उसने हाथ जोड़ कर कहा कि मेरे स्वर्गीय पिता की तुमने स्मृति दिला दी, यह बहुत अच्छा किया । इस क्षण में मुझे खुद उनकी याद आनी चाहिए थी । लेकिन मैं तुमसे कहूँ, मैं…

राष्ट्रभाषा, राजभाषा या संपर्कभाषा हिंदी

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मेरी सेवानिवृत्ति

एक दिन मैं भी
ऐसे ही सेवानिवृत्त हो
कर
जाउंगा कार्यालय से

लोग अनमने मन से
मुझे भी कुछ हार पहनाएंगे
थोड़े मेरी प्रशंसा में
वे शब्द कहेंगे
जिनमें न रस होगा
न ताज़गी
और फिर खाने-पीने
का दौर शुरु हो जाएगा

तब मैं घर लौट आऊंगा
और लोग धीरे-धीरे
मुझे भूल जाएंगें
कार्यालय वैसे ही चलता
रहेगा
जैसे आज चलता है
बस मैं न रहूंगा
न मेरे हस्ताक्षर होंगे
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होगा एक विराट शून्य
जिसमें धीरे-धीरे
सब समा जाएगा
और अस्तित्व अपनी
एक महायात्रा पूरी
कर चुका होगा