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गोत्र या प्रवर की वैज्ञानिकता

सगोत्र और सप्रवर निषेध में समाजशास्त्री कोई वैज्ञानिकता नहीं देखते। वे इसे सामाजिक विकास का एक प्रारूप मात्र स्वीकार करते हैं।उनके अनुसार यह कोई सनातन परम्परा नहीं है,क्योंकि यज्ञ के लिए चुने गए ऋषि स्वेच्छिक हैं,न कि यह उनके साथ कोई रक्त संबंध का द्योतक है और कोई भी व्यक्ति स्पष्टत: अपने गोत्र या प्रवर का दावा नहीं कर सकता। फलत: समाज शास्त्रियों के लिए गोत्र और प्रवर प्रत्यय केवल धर्मशास्त्रीय शब्द मात्र हैं।

लेकिन हमारा मत है कि हिंदू धर्म इस बात को समझता रहा है कि विवाह के लिए  संबंधों में रक्त निकटता नहीं होनी चाहिए। इससे अनेक आनुवंशिक विसंगतियां पैदा होती हैं। इसलिए उन्होंने विवाह के लिए गोत्र व प्रवर का  प्रावधान किया। यदि सामाजिक व्यवस्था के अंतर्गत इसका अनुपालन किया जाए तो बेहतर संतति की संभावनाएं बढ़ जाती हैं।

ओशो का कथन है कि स्त्री-पुरुष जितनी अधिक दूरी पर विवाह करते हैं उनकी संतान उतनी ही अधिक प्रतिभाशाली और गुणी होती है। उनमें आनुवंशिक रोग होने की संभावनाएं कम से कम होती हैं। उनके गुणसूत्र बहुत मजबूत होते हैं और वे जीवन-संघर्ष में परिस्थितियों का दृढ़ता के साथ मुकाबला करते हैं।

इस संबंध में आप क्या कहते हैं? आपकी टिप्पणियों का इंतजार रहेगा।


टिप्पणियाँ

  1. हमारे यहाँ तो नाड़ी दोष अर्थात समान नाड़ी (आदि, मध्य और अन्त्य) वाले व्यक्तियों में विवाह वर्जित माना जाता है... इसमें भी होने वाली संतानों में अनुवांशिक विसंगतियाँ देखी गयी हैं!!
    अच्छी श्रृंखला है मनोज जी!!

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  2. मनोज जी,
    गोत्र प्रवर में दोनों ही बातें हैं - एक गुरुकुल में जहाँ विभिन्न असम्बद्ध परिवारों के बच्चे भी हो सकते थे वहीं उस ऋषि के अपने वन्शज भी होते थे, उनमें तो रक्त सम्बन्ध था ही, भले ही पूरे गोत्र/प्रवर में न भी हो।

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  3. इससे कुछ अनुवांशिक बीमारी का खतरा होता है।
    एक राज्य में मामा की लड़की से शादी करना बुरा नहीं माना जाता। उस जगह एक प्रकार की अनुवांशिक बीमारी आम है।

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  4. यह भी सुना है कि मुसलमानों में नजदीकी संबंधों में वैवाहिक संबंध होते हैं लेकिन कालांतर में उनमें अनुवांशिक दोष के मामले लगभग समाप्त हो गए हैं. बढ़िया आलेख. दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएँ.

    उत्तर देंहटाएं
  5. हमारी और से आपको और आपके सम्पूर्ण परिवार को दीपावली की हार्दिक शुभकामनायें....

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  6. Ab zamana bada aage nikal gaya hai .
    Ab to shikshit varg ko jativaad me vishvas hee nahee raha..fir gotr to koi mayne hee nahee rakhata .Manoj jee aajkal pandit hee har niyam ka tod batate hai udahran ke tour par ek ladkee ka rishta janha tay huaa pata chala ki gotr ek hee hai panditjee bole ladkee ka mama bitiya ko god lele aur kanyadaan karde fir koi dosh nahee .....
    :(
    accha laga aapka aalekh .

    उत्तर देंहटाएं

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