बुधवार, 3 मार्च 2010

आध्यात्म

सपने टूटे
दिल चटखा
सब कुछ बिखरा
एक अटूट रिश्ता
बांधे रहा मुझे उससे
जो अदृश्य था
लेकिन मजबूत था इतना
कि जो बिखर जाना चाहिए था
उसे आरोह के शिखर तक पहुँचा कर
अंशों में स्वयं का रूप
दिखा गया
मैं अभिभूत हूँ उस शक्ति से
जो सदा मुझे अंशों में
उस अनंत का रूप दिखा देती है
और यात्रा को कभी समाप्त नहीं होने देती
सब कुछ सूत्रबद्ध सा बंधा है
टूटन में मुक्ति है ।

5 टिप्‍पणियां:

  1. Manoj Bhai!

    The humanity is living in a dream. कोई खुली आंख का ख्याब है तो कोई बन्द आंख का. But one thing is sure, Life is beautiful!

    More often, pain is a great teacher. the experince called life has its ups and downs....in deeper sense we all are connected with divine energy...waves of sea appears separate but in deep down sea is one.....
    infinite..bottomless...like a mystique

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  2. कुछ झंझावात नहीं खंडित कर सकते
    उस अटूट बंधन को
    जो बस है
    कब से? कब तक? के प्रश्नों से परे
    प्रत्येक अंश में विराजमान
    प्रतिबिम्बित एवं प्रतिध्वनित
    शश्श्श्श्श्श्श्श्श ध्यान से सुनो
    कहीं ये उसी की पुकार तो नहीँ!!

    मनोज जी .. साधुवाद के पात्र हैं ..आत्मा को छू लिया आपकी पंक्तियों ने..
    शिव प्रिय वर्मा

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  3. अद्भुत सुन्दर रचना! आपकी लेखनी की जितनी भी तारीफ़ की जाए कम है! बधाई!

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