सोमवार, 4 अक्तूबर 2010

जीवन-संगीत

संगीत तुम्हारा गीत हमारा 
आओ हम मिल कर खेलें 
एक खेल ऐसा जिस में सुर हो
हमारा तुम्हारा.

जब सुर से सुर मिले 
तो एक संगीत बने
जीवन एक गीत है 
जिसे सांसों के संगीत पर गाना है 


सांस आती जाती है एक लय में 
रास आती जाती है जिंदगी एक वय में
खास बात होती है जिंदगी एक साथ में
साथ सांसों सा हो, तो जिंदगी एक संगीत है .

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी रचना रोमानी भी है और आंतरिक साधन की भी व्याख्या है. बहुत ही सुंदर.

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  2. मनोज बाबू, साँसों के लय ताल को जीबन का संगीत बना दिया आपने... यह कला हमरे जीवन से ऐसी जुड़ी है कि कोई दुनिया को रंगमंच कहता है तो कोई संगीत..यदि हम जीवन की इन्हीं वविस्मृत कलाओं को पुनः जीवंत कर सकें तो जीवन संगीतमय हो जाए. प्रणय और प्राण की व्याख्या करती एक मनभावन कविता!

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  3. जीवन वीणा को झंझकृत कर देने वाले इस जीवन संगीत को कविता की वेणी में बांध कर आपने रोम रोम महका दिया।
    शुक्रिया!

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  4. सुन्दर...!
    साँसों का जीवन से रिश्ता तो है ही...
    आभार..!

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