शनिवार, 16 अक्तूबर 2010

सलिल वर्मा उर्फ चला बिहारी ब्लॉगर बनने














जगमग अंदर में हिया , दिया न बाती तेल
 परम प्रकासक पुरुष का, कहा बताऊं खेल 
तुलसी की ये पंक्तियाँ संवेदनशील हृदय के स्वामी सलिल वर्मा जी के लिए हैं । सलिल वर्मा जी से परिचय चैतन्य आलोक के माध्यम से हुआ । पिछले वर्ष नवम्बर में मैं नागपुर से स्थानांतरित होकर चंडीगढ़ आया तो एक कवि सम्मेलन के लिए चैतन्य जी से कविता की कुछ पंक्तियाँ सुनी तो चैतन्य जी से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सका । फिर उनकी (चैतन्य जी) प्रतिभा को देख ब्लॉग लिखने की सलाह दी । चैतन्य जी और सलिल जी दो अलग शहरों में रहते हुए भी प्रतिदिन विचारों का आदान-प्रदान करते रहते । कुछ महीनों में ही हमारे सामने सलिल जी और चैतन्य जी का "सम्वेदना के स्वर" ब्लॉग देखने को मिला और धीरे-धीरे मैं भी उनकी बातचीत में यदा-कदा शामिल होने लगा । थोड़े से समय बाद मुझे "उड़न -तश्तरी" बलॉग पर "चला बिहारी ब्लॉगर बनने" की टिप्पणी पढ़ने को मिली,...मैं इस बेनामी व्यक्ति से प्रभावित हुआ । कुछ महीनों तक मैं अक्सर चैतन्य जी से "चला बिहारी ब्लॉगर बनने" की टिप्पणियों की चर्चा करता रहा । तब मुझे यह कतई ज्ञात न था कि "चला बिहारी ब्लॉगर बनने" वाले  और कोई नहीं बल्कि स्वयं सलिल जी हैं । यह राज तो तब खुला जब समीर लाल और सलिल जी के बीच टिप्पणियों को लेकर तक्ररार होने लगी और एक दिन चैतन्य जी ने इस बात का रहस्योद्-घाटन किया कि "चला बिहारी ब्लॉगर बनने" वाले बिहारी बाबू हमारे सलिल जी ही हैं ;। बाद में सलिल जी बेनामी की गुहा से बाहर निकल आए और अपने नाम के साथ लिखने लगे । आज तो वे ब्लॉग जगत में निरंतर सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ रहें हैं । उनकी टिप्पणियाँ किसी भी रचना के लिए महत्त्वपूर्ण होती हैं । 

     अपने ब्लॉग के अपने परिचय में वे लिखते है:  सलिलवर्मा,वल्दः शम्भु नाथ वर्मा,साकिनः कदम कुँआ, पटना,हाल साकिनः नोएडा. हम तीन माँ के बेटा हैं,बृज कुमारी हमको जनम देने वाली,पुष्पा अर्याणी मेरे अंदर के कलाकार को जन्म देने वाली,अऊर गंगा माँ जिसके गोदी में बचपन बीता अऊर कॉलेज (साइंस कॉलेज/पटना विश्वविद्यालय) की पढाई की.बस ई तीन को निकाल लिया तो हम ही नहीं रहेंगे...
इस परिचय को पढ़ने के बाद कोई भी पाठक यह सहज ही अनुमान लगा सकता है कि सलिल जी में सहृदयता और सामाजिकता एक हो गई हैं । जो स्वयं को तीन माँ का बेटा कहता है ; उसकी संवेदनाएँ कितनी गहरी होंगी । हृदय कितने ममत्व से भरा होगा । और इनके प्रकृति प्रेम का अनुमान तो इसी बात से लगाया जा सकता है कि इन्होंने गंगा को माँ के समान दर्जा दिया और जहाँ से पढ़ाई की उस संस्थान को भी दिल मे बिठलाए हुए हैं ।
इनकी रुचियों में संगीत ,साहित्य और अभिनय की त्रिवेणी है । इनके ब्लॉग को पढ़ने पर संगीत की मधुर स्वर लहरियाँ सुनाई पड़ती हैं । अपने अनुभवों को इस ढ़ग से प्रस्तुत करते हैं कि पाठक एक बार पढ़ना शुरु कर दे तो अंत तक उनके सम्मोहन पाश में बँधा रहता है । इनकी दृष्टि में संगीत वही अच्छा होता है जिसको सुनकर व्यक्ति अपना अस्तित्व भूल जाए । सलिल जी का साहित्य में गहरा दखल है । उर्दू, अरबी,हिंदी, बंगला, मलयाली और अंग्रेजी भाषाओं पर इनका अच्छा अधिकार है । ग़ज़ल के व्याकरण की समझ ने इन्हें उर्दू शायरी का नगीना बना दिया है । साखी ब्लॉग पर इनकी सटीक टिप्पणियाँ इस बात की परिचायक हैं ।

राही मासूम रजा, सआदत हसन मंटो, गुलजार ,हरिवंश राय बच्चन, शंकर, राजेश रेड्डी , जेम्स हेडली, रस्किन बाँड, मोपासाँ, ओ.हेनरी सरीखे साहित्यकारों को न केवल इन्होंने पढ़ा है, बल्कि उन पर चिंतन, मनन और गुनन भी किया है ।

थोड़ा बहुत हमने इनका अभिनय भी देखा है...मार्फत चैतन्य जी । वहाँ भी ये किसी से कम नहीं ठहरते ।

पिछले दिनों गूँज अनुगूँज के संदर्भ में बात निकली । कुछ हँसी-मजाक की बातों ही बातों में अनुगूँज शब्द को लेकर और अनु उपसर्ग को लेकर बात हो रही थी...तो इनके मुख से एक कविता अवतरित हुई । यह कविता यहाँ प्रस्तुत है :-




अनुगूंज उठी अंतर्मन से 
अनुसरण लगा उसका करने
अनुराग जगा ऐसा मन में
अनुनाद लगा उसका सुनने.
अनुरोध प्रिये से इतना है
अनुदान प्रेम का मुझको दे
अनुलम्बन दूर करे अपना
अनुकम्पा मुझ पर बरसा दे.
अनुदार नहीं वह हो सकता
अनुताप वियोग का क्यों देगा
अनुपम है प्राण प्रिये मेरा
अनुबंध भला क्यों तोड़ेगा.
अनुपस्थित हो तुम आज प्रिये
अनुगामी बन कर आओगे
अनुदेश सुनोगे जब दिल का
अनुशासन ना रख पाओगे!

12 टिप्‍पणियां:

  1. सलिल वर्मा जी का परिचय करा कर आपने अच्छा किया. इनका नाम कई ब्लॉगों पर पढ़ा था. इन्हें ढूँढना पड़ेगा.

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  2. बहुत उम्दा परिचय हमारे खास परिचित का...अच्छा लगा बिहारी बाबू के बारे में यह जानना

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  3. मनोज भाई! चैतन्न बाबू के सब्दों में ई तो आप जलेबी बना दिये हैं हमरे ब्यक्तित्व का... माने हमको तो एही लग रहा है कि हे धरती मईया फटो अऊर हम उसमें समा जाएँ... एगो कबिता जो हम खास अपके लिए लिखे अऊर ऊ भी पता नहीं कबिता का स्रेनी में आता है कि नहीं अऊर इसपर आपा एतना लिख जाइएगा हम त अनुमान लगएबे नहीं किए थे.. हम तो पढने वालों को एही अनुरोध करेंगे कि
    बेखुदी बेसबब नहीं ग़ालिब
    कुछ तो है, जिसकी पर्दादारी है.
    मनोज जी आभार आपका, लेकिन मामूली कबिता के कंधे पर एतना भार .. ये अच्छी बात नईं है!!

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  4. Bahut achha parichay karvaya hai! Is me koyi shak nahee,ki inka kayi bhashaon pe gahra prabhutv hai!
    Samvedansheel to khair Salil ji hain hee...aur chaitany ji bhee!

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  5. Bahut achha parichay karvaya hai! Is me koyi shak nahee,ki inka kayi bhashaon pe gahra prabhutv hai!
    Samvedansheel to khair Salil ji hain hee...aur chaitany ji bhee!

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  6. सलिल जी का इतना अच्छा परिचय पढकर मन प्रसन्न हुआ। आपकी शैली सलिल जी के व्यक्तित्व की तरह ही बहुत प्रशंसनीय है।

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  7. सलिल वर्मा जी के बारे में जानकर अच्छा लगा
    और सोने पर सुहागा आपकी शैली.....

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  8. सलिल जी से परिचय कराने की हार्दिक शुभकामनाएं...........



    चन्द्र मोहन गुप्त

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  9. Raheema 1( Bikhare Sitare"pe aapkee tippanee: Raat ke 12 baje...doctor kaa aana..
    Jawab: Police mahakme me jo clinic hota hai,wahan, doctor aur nurse 24 ghante tainat rahte hain. Gar Transport kaa intezaam ho jaye to nurse injection dene aahi jatee hai. Doctor kee zaroorat ho to doctor bhee aate hain.Ye maine apne anubhav se likha hai!
    Waise badee khushee huee,ki,aap dilchaspi leke padh rahe hain!

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  10. हम तो बिहारी बाबु को ही जानते रहे सह्रदय सलिल के बारे में कुछ नयी जानकारी आज मिली ! आभार आपका !

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  11. वाह!!
    सलिल जी के शब्दसम्पन्न प्रबुद्ध व्यक्तित्व से परिचय हुआ।

    काव्य तो शब्दानुबंध ही है। जबरदस्त,"अनुपम"

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