रविवार, 11 जुलाई 2010

बिगड़े हालातों में काश्मीर का दौरा

अभी परसों ही काश्मीर घाटी से लौटा हूँ । कार्यालय के काम से श्रीनगर जाना हुआ । कुल 10 दिन श्रीनगर में रहा । इन 10 दिनों में जहाँ काश्मीर के नैसर्गिक सौंदर्य को देखने का अवसर मिला वहीं दूसरी ओर काश्मीर की वर्तमान स्थिति को देखने व समझने का एक अनुभव भी रहा । श्रीनगर शहर को अब तक आरजू, काश्मीर की कली जैसी फिल्मों और गुल गुलशन गुलफाम जैसे टी.वी. धारावाहिकों या काश्मीर पर बनी डाक्यूमेंटरी फिल्मों में ही देखा था । धरती का स्वर्ग कहा जाने वाला काश्मीर वस्तुत: स्वर्ग ही है । चारों ओर फैला नैसर्गिक सौंदर्य आँखों को अद्-भूत सुकून और आनंद देता है । श्रीनगर एअर-पोर्ट से निकलते ही जिन सुंदर वादियों, मकानों और सड़कों के दर्शन होते हैं, वे खूबसूरत अहसास देते हैं । यद्यपि मैं श्रीनगर सड़क मार्ग से जाने वाला था, लेकिन घाटी के हालात बिगड़ जाने से जम्मू-श्रीनगर रास्ता बंद कर दिया गया था । इसलिए मुझे जम्मू से श्रीनगर का सफर एअर से करना पड़ा । फिर श्रीनगर पहुँचते ही कार्यालय के कामों व मिटिंग की व्यस्तताओं में डूबा रहा । इस दौरान डल झील और लाल चौक के आस-पास के इलाके में आना जाना लगा रहा । कभी मिटिंग में शामिल होने वाले मेहमानों के लिए उपहार खरीदने तो कभी हमारे अधिकारियों को श्रीनगर घुमाने के लिए डल पर चार बार जाना हुआ । डल झील बहुत बड़ी है । सैंकड़ों एकड़ में फैली इस झील पर शिकारों में विहार करना एक अलग तरह का आनंद देता है । इस झील में होटलनुमा बोटहाउस हैं । जहाँ रहकर आप प्रकृति के विशुद्ध मनोरम दृश्यों का आनंद ले सकते हैं । विशेषकर चाँदनी रातों में...जब पूर्णिमा का पूरा चाँद झील में विभिन्न दृश्य प्रस्तुत करता है । झील का पानी आजकल गंदा हो गया है । वर्षों से झील की सफाई नहीं हुई है या हुई भी है तो ऊपर-ऊपर से । यहाँ के शिकारा चलाने वालों से बात किया तो पता चला कि झील की सफाई के लिए करोड़ों रुपए सरकार देती है...लेकिन पूरा पैसा कभी झील पर खर्च नहीं होता...भ्रष्ट अधिकारियों और बिचौलियों के द्वारा अधिकाँश पैसा हड़प लिया जाता है । झील पर अतिक्रमण बहुत बढ़ गया है और झील का आकार पहले की अपेक्षा काफी कम रह गया है ।

जिस होटल में, ललित ग्राँड पैलेस में मिटिंग थी, वह श्रीनगर का पाँच सितारा खूबसूरत होटल है । यहाँ के बगीचे के दक्षिण छोर से श्रीनगर की वादियों का जो नजारा देखने को मिला , वह अद्-भूत और आत्मा को एक अलौकिक अहसास करा रहा था ।

इस दौरान घाटी के हालात बिगड़ते रहे । रोज ही सीआरपीएफ और स्थानीय लोगों के बीच मुठभेड़ जारी थी ।  सीआरपीएफ पत्थर बरसाती और प्रदर्शन करती भीड़ को तीतर-बितर करने के लिए बहुत बार गोली चलाने को विवश हुई और लोगों की जाने जाती रही । कभी 3 , कभी 4 लोग सीआरपीएफ की गोली की शिकार होते रहे । एक दिन एक 9 साल का बच्चा मारा गया । एक दिन एक 24 वर्षीय महीला मारी गई । घाटी का माहौल बहुत बिगड़ गया । लोगों को घरों में ही रखने के लिए सख्त कर्फ्यू लगा दिया गया । देखते ही गोली मारने के आदेश आ गए ।  पुलिस की चौकसी बढ़ चुकी थी । शहर के अंदरुनी हिस्से अधिक संवेदनशील बन चुके हैं ।

इन हालातों की गहराई में जाने के विचार चलते रहे । काश्मीर के बहुत से लोग आजादी चाहते हैं ? बच्चों के कोमल मनों में आजादी के शब्द घोले जा रहें हैं । लेकिन किस से आजादी ???  स्वर्ग सदृश काश्मीर घाटी को को नरक में तबदील कर देने वाले कौन लोग हैं ? शायद ये सवाल इतने आसान नहीं हैं । हमेशा की तरह राजनीति तो इसका एक बड़ा कारण है ही, साथ ही शायद आज भी काश्मीर के लोग स्वयं को भारत से जुदा समझते हैं । युवा बेरोजगार हैं । कुछ कानून ऐसे हैं जो केवल काश्मीर पर ही लागू होते हैं और पूरे भारत पर नहीं । काश्मीर की सरकार को करोड़ों रुपए केन्द्र सरकार से विकास और खुशहाली के लिए दिए जाते हैं । लेकिन इसके बावजूद लोगों को अलगाववादी ताकतें भड़काने में कामयाब रहती हैं । कुछ लोग कहते हैं इसमें बाह्य ताकतों का हाथ है ।

श्रीनगर में कर्फ्यू के बावजूद सुबह -शाम बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए यात्रा के साधन मिल ही जाते हैं । हवाई सेवाएँ भी निर्बाध रूप से जारी हैं । इधर हरियाणा पंजाब व चंडीगढ़ में भारी बारीश के कारण बाढ़ के हालातों की खबरें टीवी से मिलती हैं । तो दूसरी ओर मैं होटल में बैठा हालात सामान्य होने का इंतजार कर रहा हूँ । मुझे मिटिंग खत्म करके 7 जुलाई को ही चंडीगढ़ के लिए निकलना था, लेकिन नहीं निकल सका । 8 जुलाई को किसी तरह एक वैन में जगह मिल पाई और मैं अमरनाथ यात्रियों के साथ जम्मू पहुँचा । श्रीनगर से जम्मू की यात्रा में भी बहुत से सुंदर प्राकृतिक दृश्य देखने को मिले । अमरनाथ यात्रियों के लिए जगह-जगह लंगर चल रहा था । जिसकी वजह से रास्ते में बहुत सा ट्रैफिक जाम भी रहा ।

4 टिप्‍पणियां:

  1. खूबसूरत लम्हों में क़ैद लम्हों की आपकी कश्मीर यात्रा का व्रतांत रोमांचित करता है ....

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  2. खूबसूरत शब्द चित्र मनोज भाई!
    हमने भी महसूस किया थोड़ा सा कश्मीर अपने भीतर!
    यह सवाल अभी भी मौज़ूद है !

    किससे स्वतंत्रता? कैसी स्वतंत्रता ?
    स्वर्ग को नर्क में बदलने की स्वतंत्रता ?

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  3. धरती के स्वर्ग का ई हालत के लिए कौन जिम्मेवार है...लेकिन अब ईस सवाल का जवाब बेमानी हो गया है… डल झील का सुंदरता के बारे में केतना सुने थे लेकिन दुर्दसा सुनकर अफसोस हुआ... कभी कहा करते थे कि एतना रोमांटिक जगह का नाम डल (dull) कौन रख दिया...

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  4. पूरा चित्र कहीं व्यथित करता है. कश्मीर के मामले में आज़ादी का नारा एक छोटे से समूह की आर्थिक मुफ़्तख़ोरी का नतीजा है.

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