बुधवार, 28 जुलाई 2010

स्वयं होना काफी है

1. सिर्फ अज्ञान के कारण ही दो व्यक्ति किसी एक बात पर राजी होते हैं ।
2. किसी भी तरह की प्रभावित करने की चेष्टा बहुत गहरे में दूसरे व्यक्ति को गुलाम बनाने की चेष्टा है ।
3. प्रभावित होने से बचना हो तो पक्ष-विपक्ष से बचना पड़ता है । नहीं तो प्रभाव पड़ ही जाता है ।
4. प्रत्येक व्यक्ति अद्वितीय है । दूसरों से तुलना न करें ।
5. एक-एक मनुष्य अतुलनीय है ।
6. न मानने की फिक्र करना, न न मानने की ।
7. आदमी एक अनंत घटना है । उसमें अनंत रूप हैं ।
8. स्वयं की विचार प्रक्रिया को समझें ।
9. आदमी का मन बहुत आश्चर्यजनक है, उसके लिए निषेध ही आमंत्रण है ।
10. मित्र जब दुखी होते हैं, तो दुश्मनी से कम पर नहीं रुकते ।
11. मैं मित्र नहीं बनाता, क्योंकि मित्रता में पोटेंशियल शत्रु छिपा है ।
12. जिंदगी बहुत इनकंसिस्टेंट है, सिर्फ मौत कंसिस्टेंट है ।
13. अधिकतर संत सैडिस्ट होते हैं या मेसोचिस्ट होते हैं ।या तो वे दूसरे को सताते हैं या स्वयं को सताते हैं । और जो खुद को सताने में कुशल होता है वह दूसरे को सताने का अधिकार पा जाता है ।
14. जब तक सीधे सत्यों को देखने की हिम्मत न जुटाएँ, बड़ी मुश्किल होती है ...स्वयं को देखने की ।

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