बुधवार, 15 सितंबर 2010

जुंग के अनमोल विचार

  • खुशियों से सावधान रह । 
  • शांति ठीक वहां से शुरु होती है, जहां महत्त्वाकांक्षा का अंत हो ।
  • यदि यह जान लिया जाए कि परिग्रही अपनी प्रचुरता का कितना कम भोग-उपभोग कर पाते हैं, तो संसार से बहुत सी ईर्ष्या मिट जाए ।
  • ओ  इंसान ! अपने आप को जान; समस्त ज्ञान वहीं केन्द्रीभूत होता है ।
  • बादल चाहें पदवियां और जागीरें बरसा दें, दौलत चाहे हमें ढ़ूँढ़े, लेकिन ज्ञान को तो हमें ही खोजना पड़ेगा ।

3 टिप्‍पणियां:

  1. अच्छी-अच्छी बातें....सुन्दर प्रस्तुति.
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    'पाखी की दुनिया' - बच्चों के ब्लॉगस की चर्चा 'हिंदुस्तान' अख़बार में भी.

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  2. बिल्कुल सही कहा है.....
    ज्ञान को तो हमें ही खोजना है !!!

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