रविवार, 2 जनवरी 2011

शेख और आलम

कवि आलम रीतिकाल के प्रसिद्ध कवि हुए । इनका जन्म सनाढ्य ब्राह्मण जाति में हुआ । उस समय देश में औरंगजेब का राज था । इनकी कवि प्रतिभा और चतुराई से औरंगजेब का लड़का बहुत प्रभावित था । उसके आग्रह पर ही आलम उनका राज कवि बना । एक बार उन्हें एक समस्या पहेली के रूप में दी गई और इसे पूरा करने के लिए कहा गया । दोहे की वह पंक्ति कुछ यूँ थी :-
"कनक छरी सी कामिनी, काहे को कटि छीन "
बहुत सोच-विचार करने पर भी वे इसके समाधान में दूसरी पंक्ति न सोच सके । जिस कागज पर यह पंक्ति लिखी गई थी, वह कागज उन्होंने अपनी पगड़ी में रख लिया । वह कागज उनकी पगड़ी के साथ धुलने के लिए रंगरेजिन के पास चला गया । कहते हैं कि वह रंगरेजिन बहुत सुंदर और चतुर थी । उसका नाम शेख था । जब उसने पगड़ी को धोने के लिए खोला, तो उसके हाथ वह कागज लगा, जिस पर पहेली-रूपी में वह पंक्ति लिखी थी । उसने समस्या को ध्यान से पढ़ा और उसके नीचे लिख दिया :-
"कटि को कंचन काटि विधि कुचन मध्य धर दीनी ।"
जब पगड़ी धुल गई तो उस कागज को ज्यों का त्यों उसमें रख दिया । जब आलम ने पगड़ी लेकर अपना कागज देखा तो उसमें समस्या का उत्तर लिखा हुआ देख, वे समझ गए कि यह काम रंगरेजिन का ही हो सकता है । वे तुरंत ही उसके घर गए, और पगड़ी की धुलाई एक आना के साथ उसे एक हजार रुपए इनाम स्वरूप दिए । इस घटना के बाद, उनमें प्रेम हो गया। कुछ समय बाद वे शादी के बंधन में बंध गए । उससे उन्हें एक लड़का हुआ, जिसका नाम उन्होंने जहान रखा । 

एक बार औरंगजेब का लड़का आलम के घर के सामने से निकल रहा था । तो शेख को देख उसने पूछा कि क्या आप ही आलम की स्त्री हैं ? तब शेख ने उत्तर में कहा, "जी हां, जहांपनाह, जहान की माँ मैं ही हूँ ।" इस उत्तर को सुनकर वह बड़ा लज्जित हुआ और फिर आगे उसने कभी छोटे मुँह बड़ी बात नहीं की । 

5 टिप्‍पणियां:

  1. कालेज के दिनों में हमारे एक लेक्चरर बड़े रसिक ढ़ंग से इस घटना का उल्लेख किया करते थे. मनोज भाई आपने भी....अच्छा लगा यार!!!
    ;))

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  2. पूरे प्रकरण में समस्या के रूप में दिए गए दोहे की दूसरी पंक्ति का कुछ अता पता नहीं मिला ... किस्सा शुरू हुआ था कवि आलम से और समाप्त हुआ उनकी पत्नी शेख पर .... किस्से के आगाज और अंजाम में सम्बन्ध बनाने के लिए दुबारा पढ़ा ..
    फिर भी छोटा मुंह बड़ी बात कह दी हो तो मुआफी ....

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  3. पुखराज जी !!! जो समस्या दी गई थी वह दोहे की पहली पंक्ति थी ...शेख ने जो जवाब लिखा उससे दोहा पूरा हुआ, पूरा दोहा कुछ यूं बना :

    कनक छरी सी कामिनी, काहे को कटि छीन ।
    कटि को कंचन काटि विधि कुचन मध्य धर दीनी ॥

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