गुरुवार, 13 जनवरी 2011

स्वप्न

च्वांगत्सू ने स्वप्न में देखा कि वह एक तितली है । रंग बिरंगी, पंख फड़फड़ाती, उड़ती, फूलों पर मँडराती ,तितली । तितली के रूप में उसे जरा भी ध्यान नहीं आया कि वह वास्तव में एक इंसान है । अपने मनुष्य रूप का कोई बोध उसके मन में नहीं था । फूलों पर मँडराते-मँडराते अचानक उसकी नींद टूटी ।

वह सोचने लगा ," क्या मैं एक मनुष्य हूँ, जो तितली होने का स्वप्न देख रहा था ? या मैं एक तितली हूँ जो मनुष्य होने का स्वप्न देख रही है ?"

7 टिप्‍पणियां:

  1. स्वप्न,जाग्रति,सुषुप्ती और तुरीय
    चेतना के इन तलों को टटोलनें में सहायक झेन कथा फिर याद कराने के लिये धन्यवाद!

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  2. बड़ी सार्थक पोस्ट है मनोज जी !
    आभार ,
    -ज्ञानचंद मर्मज्ञ

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  3. aapke blog par a kar sadaiv hee badee shanti miltee hai.
    bahut badiya lagee ye katha.

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