शनिवार, 16 जनवरी 2010

जिंदगी की ए बी सी

जिंदगी की ए बी सी अर्थात जिंदगी का आधार क्या है ? सार्थक जिंदगी क्या है ? जीवन को कैसे जिया जाए कि जीवन में आनंद घटित हो । अंग्रेजी के पाँच शब्दों से हम इसे समझने की कोशिश करते हैं ।

जीवन की ए अवेयरनेस (awareness) अर्थात सजगता है । व्यक्ति की सजगता उसके जीवन को बनाने में अहम भूमिका निभाती है । यह सजगता ही है जो व्यक्ति की रुचियाँ निर्मित करती है । जहाँ व्यक्ति सहज रूप में सजग होता है, वही उसका मूल रुचि का विषय होता है । व्यक्ति अपनी सजगता,जागरुकता का दायरा बढ़ा कर विभिन्न विषयों में रुचि पैदा कर सकता है । व्यक्ति की सजगता जितने अधिक विषयों में होगी, उतनी ही उसकी बुद्धि प्रखर होगी । जहाँ व्यक्ति में सजगता का अभाव होगा, वहाँ वह कुछ खो देगा । लेकिन जहाँ कहीं वह सजग होगा, वहाँ जरूर वह कुछ न कुछ अपनी रुचि का ढ़ूढ़ लेगा । उचित होगा यदि हम कहें कि सजगता ज्ञान की कुंजी है । सजगता के दायरे को बढ़ा कर हम अधिकतम ज्ञान अर्जित कर सकते हैं ।

जीवन की बी बिलीफ़ ( belief) अर्थात विश्वास या धारणा है । व्यक्ति के विश्वास या धारणाएँ कैसी हैं ? यह उसके जीवन के प्रति दृष्टिकोण को निर्धारित करते हैं । हर व्यक्ति के अपने विश्वास होते हैं । उन विश्वासों के सहारे ही वह आगे बढ़ता है और दिन प्रति-दिन विश्वास बढ़ते जाते हैं । प्राय: व्यक्ति अपने विश्वासों या धारणाओं को ही जीवन मानता है । कुछ विश्वास समय के साथ और नए अनुभव आने पर बदल जाते हैं, जबकि कुछ विश्वास व्यक्ति कभी नहीं बदलता । विश्वास का निर्माण विभिन्न माध्यमों से होता है । कोई भी ज्ञान एक विश्वास ही है । विज्ञान भी एक विश्वास है । विज्ञान में पुराने तथ्य तब तक स्वीकृत रहते हैं, जब तक कि उन्हें नए आविष्कारों/अनुसंधानों से नकार न दिया जाए । जीवन में आपके विश्वास क्या हैं उन्हीं के अनुरूप आप है । आज आप जो हैं, आपके अब तक के विचारों (विश्वासों) के कारण हैं और आगे जो होंगे वे भी अपने विचारों के अनुरूप ही होगें । कहने का अभिप्राय: यह है कि आप अपने विचारो(विश्वासो) पर सवार हैं , जैसे आपके विचार होंगे वैसे ही आप होंगे , आपका जीवन होगा ।

जीवन की सी चायस (Choice) अर्थात चुनाव या चुनना है । हर व्यक्ति की अपनी पसंद या नापसंद होती है । यह आपके चुनाव पर निर्भर करता है । बचपन से ही आप कुछ न कुछ चुनते आए हैं । कहते हैं कि व्यक्ति अपने माँ-बाप के अतिरिक्त सब कुछ चुनता है । उसके दोस्त कौन हों, वह कपड़े कैसे पहने, वह क्या पढ़े, वह कौन सा टी.वी. कार्यक्रम देखे ... यह सब वह चुनता है । उसके इस चुनाव में वह अपना जीवन या चरित्र निर्माण कर रहा है । व्यक्ति का व्यक्तित्व उसके चुनाव पर निर्भर है । जैसा उसने समाज, दुनिया में से चुना वैसा ही उसने अपना व्यक्तित्व पाया है । तो व्यक्ति का चुनाव उसे बनाता है । इसलिए आपका आज का चुनाव सजग होना चाहिए, क्योंकि वही आपका भविष्य होने वाला है ।

अधिकांश लोगों के जीवन की ए बी सी उनकी सजगता के दायरे, उनके विश्वास और उनके चुनने के ढ़ँग तक ही सीमित रहती है । लेकिन कुछ लोग हैं जो इन तीनों से पार जाने की हिम्मत करते हैं और जीवन के चौथे पड़ाव को लाँघते हैं । यह चौथा पड़ाव निर्णायक है । जीवन का यह चौथा अक्षर डी अर्थात डिटैचमेन्ट (detachment)
अर्थात अनासक्ति है । व्यक्ति अपने जीवन में सचेतन जीता हुआ जब कोई विश्वास नहीं बनाता ,कुछ चुनाव नहीं करता.. वह मात्र जीवन को जीता है वर्तमान में अनासक्त भाव से । ऐसा व्यक्ति ही वस्ततुत: जीवन के आनंद को जानता है । जिस तरह से बच्चा बड़ा होने पर खिलौनों से खेलना छोड़ देता है , उसी प्रकार अनासक्त हुए व्यक्ति से जीवन के विषय छूट जाते हैं । गीता में इस स्थिति को स्थितप्रज्ञा कहा गया है ।

6 टिप्‍पणियां:

  1. बिलकुल ठीक कहा आपने.. एक सतत साधना सी है इन पर अमल करना..!

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  2. व्यक्ति अपने जीवन में सचेतन जीता हुआ जब कोई विश्वास नहीं बनाता ,कुछ चुनाव नहीं करता.. वह मात्र जीवन को जीता है वर्तमान में अनासक्त भाव से । ऐसा व्यक्ति ही वस्ततुत: जीवन के आनंद को जानता है ।

    वाह .....क्या बात कह दी गुरु जी ......हमने तो हँसना भी छोड़ दिया गुरु जी ......!!

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  3. आपकी बातों से पूरी तरह सहमत हूँ...
    बहुत अच्छा रहा आपका आलेख..

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