गुरुवार, 28 जनवरी 2010

प्रेम की पातियाँ

प्रेम मुक्त करता है, बांधता नहीं ।
प्रेम मुक्त गगन का पक्षी है, जो मानव ह्रदय में उड़ान भरता है ।
प्रेम बरसता है, गरजता नहीं ।
प्रेम खिलना जानता है,सिकुड़ना नहीं ।
प्रेम दो ह्रदयों के बीच एक अहसास है ।
प्रेम मांगना नहीं देना जानता है ।
प्रेम आँखों में चमकता है, मुँह से झरता है ।
प्रेम वह सुगंध है, जिसे सुंघने के लिए नाक की जरूरत नहीं ।
प्रेम वह ध्वनि है, जिसे सुनने के लिए कानों की जरूरत नहीं ।
प्रेम निर्भय बनाता है, भयभीत नहीं करता ।
प्रेम में हुआ जाता है, किया नहीं जाता ।
प्रेम की अनुभूति होती है, प्रदर्शनी नहीं ।
प्रेम हंसना जानता है, रोना नहीं ।
प्रेम त्याग जानता है, अधिकार नहीं ।
प्रेम सोचता नहीं, स्वीकारता है ।
प्रेम अस्तित्व का रस है और संसार का राग ।
प्रेम धैर्य देता है और इंतज़ार करता है ।
प्रेम दिल से संबंधित है, दिमाग से नहीं ।
प्रेम क्रिया नहीं, अक्रिया है ।
प्रेम शरीर नहीं, आत्मा का आत्मा से संवाद चाहता है ।
प्रेम अनंत की अनुभूति देता है ।
प्रेम सीमाओं के पार असीम की अनुभूति है ।
प्रेम शांति देता है, अशांति नहीं ।
प्रेम वह सागर है जो कभी रिक्त नहीं होता ।
प्रेम में अभाव नहीं, भाव होता है ।
प्रेम गिराना नहीं, उठाना सिखाता है ।
प्रेम में तुलना नहीं, जुड़ना होता है ।
प्रेम झुकता है, झुकाता नहीं ।
प्रेम दर्पण है जिसमें तुम अपना वास्तविक चेहरा देख सकते हो ।
प्रेम संबंधों का आइना है ।
प्रेम वह अमरबेल है जो कभी कुम्हलाती नहीं ।
प्रेम कोमल अहसास है, जिसे नन्हें बच्चे की तरह सम्हालना होता है ।
प्रेम दिन की छाया है, जो रातों में दिखाई देती है ।
प्रेम की काया नहीं है, इसलिए यह माया है ।
प्रेम रहस्य है, समस्या नहीं ।
प्रेम परम समाधान है, इसमें डूबिए ।

5 टिप्‍पणियां:

  1. सुन्दर भाव और अभिव्यक्ति के साथ आपने शानदार रचना लिखा है!

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  2. प्रेम को परिभाषित कर के रख दिया आपने...
    वाह...यह तो अद्वितीय रहा...!!

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  3. प्रेम को परिभाषित कर के रख दिया आपने...
    वाह...यह तो अद्वितीय रहा...!!

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