शुक्रवार, 13 अगस्त 2010

स्त्री

पुरुष जितना स्त्री से सीख सकता है,उतना किसी और से नहीं । - मनोज भारती

4 टिप्‍पणियां:

  1. सही कहा आपने!
    पुरुष स्त्री से पैदा होता है और सारी उम्र उसके आस-पास ही घूमता रहता है. मातृ-भाषा स्त्री ही ने सिखायी!
    सांख्य की दृष्टि में भी पुरुष और प्रकृति (यानि स्त्री)से ही सृष्टि को समझा गया है.

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  2. मनोज बाबू .. “ओर” को “और” कर लीजिए..अर्थ बिगड़ता है..हम त सारा जीबन बस स्त्रियों से ही सीखते आए हैं… हमरी माता, हमरी पत्नी और हमरी बिटिया रानी.

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  3. धन्यवाद सलिल जी भूल की ओर ध्यान दिलाने के लिए, त्रुटि ठीक कर दी गई है ।

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