सोमवार, 19 अप्रैल 2010

जर जोरु और जमीन

एक पुरानी कहावत है कि हर झगड़े की जड़ जर,जोरु और जमीन ही होती है । यह कहावत आदिकाल युग और सामंतवादी युग तथा औद्योगिक युग की अपेक्षा इस उत्तर आधुनिक युग में अधिक सही प्रतीत होती है । आज समाज में नारी की स्थिति एक वस्तु से ज्यादा नहीं है और स्वयं नारी ने अपने रूप और सौंदर्य के बाजार में भाव लगाने शुरु कर दिए हैं । कोई अपने कौमार्य की बोली लगा रही है तो कोई स्वयं की खूबसूरती के जादू को बाजार में बेच रही है ।

7 टिप्‍पणियां:

  1. विज्ञापन की दुनिया में नारी देह का प्रयोग आज अपरिहार्य्य हो गया है... शेविंग क्रीम और ब्लेड से लेकर अंडरवियर और बनियान तक के विज्ञापन नारी देह के बिना अधूरे हैं... सुंदर और असुंदर की बात दीगर ..सिर्फ देह बिकाऊ है... और इसके लिए नारी स्वयं उत्तरदायी है..

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  2. yar mujhe ye joru wali bat samjh me aai kyun ki har ladai ke piche ek mahila ka hat hota he



    shekhar kumawat

    http://kavyawani.blogspot.com/

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  3. बहुत बढ़िया लगा! उम्दा प्रस्तुती!

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