गुरुवार, 3 सितंबर 2009

ह्रदय का सूनापन

हरे भरे पेड़ों के बीच
मैं आकर्षित होता हूँ
उस पेड़ की ओर जो सूख कर
ठूंठ हो गया है


तारों भरे आकाश में
मैं आकर्षित होता हूँ
उस चाँद की ओर जो
एकाकी पड़ गया है


सुख- दुख से भरे इस संसार में
मैं आकर्षित होता हूँ
उस इंसान की ओर
जो समानुभूति रखता है -
ठूंठ हो गए पेड़ से
एकाकी पड़े चाँद से
और मेरे ह्रदय के सूनेपन से

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