बुधवार, 23 सितंबर 2009

मौलिकता

समाधि की अवस्था में मानवीय चेतना से उपजा हर विचार मौलिक है ।
प्रेम
-युक्त आलिंगन की मौन स्थिति मौलिक है।
प्रत्येक व्यक्ति स्वयं में मौलिक है
प्रत्येक क्षण मौलिक है
इच्छा रहित शांत चित्त मौलिक है
विचार रहित वर्तमान मौलिक है
फूल का खिलना मौलिक है
फूल का मुरझा कर गिरना मौलिक है
किसी पत्थर का तुम्हारे द्वारा उठाया जाना मौलिक घटना है
पत्थर स्वयं भी मौलिक है
अनुकरण रहित आचरण मौलिक है
ह्रदय का रुदन मौलिक है
किसी की बात को ठीक-ठीक उसी अर्थ में समझ लेना,जान लेना जैसा कि वक्ता के मन में है, एक मौलिक घटना है
स्वयं की अनुभूति मौलिक है
स्वयं की आह ! मौलिक है
आश्चर्य मौलिक है
जीवन मौलिक है ; मृत्यु मौलिक है
स्वयं का आविष्कार, खोज मौलिक है
स्वयं की भटकन जानना मौलिक है
पत्तों की खनखनाहट, वृक्षों की सांय-सांय, पक्षियों की चहचाहट, तारों की टिमटिमाहट, शशि का सौंदर्य, कामिनी की चंचलता मौलिक है
सद्-वचनों की अभिव्यक्ति जो स्वानुभव से निकली हो और जो चेतना को विराट रूप प्रदान करे- वह मौलिक है

नृत्य मौलिक है ;संगीत मौलिक है ; काव्य मौलिक है ; यदि इन की उद्भावना ह्रदय की जमीन पर और आत्मा की लयबद्धता तथा अंत:करण की अनुशासनबद्धता से हुई है
वह सब मौलिक है जिसे ईमानदारी से आप अपना कह सको

1 टिप्पणी:

  1. अनुकरण रहित आचरण मौलिक है ।
    किसी की बात को ठीक-ठीक उसी अर्थ में समझ लेना,जान लेना जैसा कि वक्ता के मन में है, एक मौलिक घटना है ।
    स्वयं की अनुभूति मौलिक है ।
    स्वयं का आविष्कार, खोज मौलिक है ।
    स्वयं की भटकन जानना मौलिक है ।
    वह सब मौलिक है जिसे ईमानदारी से आप अपना कह सको ।

    aap ki ukt sabhi mauliktayeN achchhi lagiN.

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