बुधवार, 7 अक्तूबर 2009

सांस साज़ और साथ

सांस आती जाती है एक लय में
रास आती जाती है जिंदगी एक वय में

खास बात होती है जिंदगी एक साथ में
साथ सांसों सा हो तो जिंदगी एक साद है

साथों में ढ़ूँढ़ते हैं हम जिंदगी का राग
बातों में खोजते हैं हम जिंदगी का राज

साथ मिल जाए गर उस माशूके मजाजी का
साज़ जिसका मेरे नगमें पर करे आशिकी हकीकत

3 टिप्‍पणियां:

  1. मनोज जी बहुत ही दुविधाओं के बीच लिखी है ये नज़्म ....पता नहीं कहाँ तक सही कह पाई हूँ .....और फिर आपने भी तो लिखा है .....

    साथ सांसों सा हो तो जिंदगी एक साद है


    साथ मिल जाए गर उस माशूके मजाजी का

    बहुत सुंदर .....!!

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  2. अत्यन्त सुंदर रचना! बहुत अच्छा लगा !

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