गुरुवार, 15 अक्तूबर 2009

सत्य

सत्य
न नया है न पुराना
न अपना है न पराया
न दिखावा है न बहाना
न लुभावना है न डरावना
न प्रचारक है न भ्रामक

वह तो अनुभव की अग्नि में
जल कर तप्त हुआ
निखरा हुआ
कुंदन है
जो बहुत से सत्यों में
अकेला अलग सा पहचाना गया

3 टिप्‍पणियां:

  1. वह तो अनुभव की अग्नि में
    जल कर तप्त हुआ
    निखरा हुआ
    कुंदन है
    जो बहुत से सत्यों में
    अकेला अलग सा पहचाना गया
    ekdam satya ,sundar rachana .happy diwali

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  2. Khoobsurat laga.....

    Achhaa shabdon main pirone ki koshish ki hai aapne......satya ko.

    koi massoom si kali gar muskaraye kabhi,
    bhigi si raat koi deep timtimaaye jo kabhi,
    tum aana merre dwar, priye, satya-grahi banke
    doob jaane us shunya surya ke paar,
    merre maajhi banke

    Apna khayaal rakhna..........

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  3. सत्य को विभिन्न आयामो से विभिन्न लोगों ने देखा है लेकिन कोई उसकी थाह तक नही पहुंच पाया है । इस रचना मे भी यह प्रयास दिखाई देता है । यह रचना मुझे अच्छी लगी ।

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