टूटते-सपने

चीन में एक अद्भूत फकीर हुआ च्वांगत्से । एक रात जब वह सोया था, तो उसने एक सपना देखा । उसने सपने में देखा कि वह तितली हो गया । खुले आकाश में, हवाएँ बह रहीं हैं और मुक्त तितली उड़ रही है । सुबह च्वांगत्से उठा और रोने लगा । उसके संबंधियों ने पूछा कि क्यों रोते हो ? च्वांगत्से ने कहा, मैं बड़ी मुश्किल में पड़ गया हूँ । रात मैंने एक सपना देखा कि मैं तितली हो गया हूँ और बाग-बगीचे में फूल-फूल पर डोल रहा हूँ । संबंधियों ने कहा, सपने हम सभी देखते हैं, इसमें परेशानी की क्या बात है ?
च्वांगत्से ने कहा, नहीं, मैं परेशान इसलिए हो रहा हूँ कि अगर च्वांगत्से रात सपने में तितली हो सकता है, तो यह भी हो सकता है कि तितली अब सपना देख रही हो कि वह च्वांगत्से नाम का आदमी हो गई है । जब आदमी सपने में तितली बन सकता है तो क्या तितली सपने में आदमी नहीं बन सकती ? मैं इसलिए मुश्किल में पड़ गया हूँ कि मैं च्वांगत्से हूँ, जिसने तितली का सपना देखा है या मैं हकीकत में एक तितली हूँ , जो अब च्वांगत्से का सपना देख रही है !
वस्तुत: न तो च्वांगत्से सपने में तितली बनता और न तितली च्वांगत्से । एक अदृश्य शक्ति दो तरह के सपने देखती है, वह रात में तितली बन जाती है, दिन में च्वांगत्से बन जाती है । लेकिन सब सपने टूट जाते हैं । क्या जीवन भी एक सपना नहीं है ? जो टूट जाता है और बिखर जाता है ।यदि वास्तव में ही जिंदगी सपना नहीं, तो क्या है ???
च्वांगत्से ने कहा, नहीं, मैं परेशान इसलिए हो रहा हूँ कि अगर च्वांगत्से रात सपने में तितली हो सकता है, तो यह भी हो सकता है कि तितली अब सपना देख रही हो कि वह च्वांगत्से नाम का आदमी हो गई है । जब आदमी सपने में तितली बन सकता है तो क्या तितली सपने में आदमी नहीं बन सकती ? मैं इसलिए मुश्किल में पड़ गया हूँ कि मैं च्वांगत्से हूँ, जिसने तितली का सपना देखा है या मैं हकीकत में एक तितली हूँ , जो अब च्वांगत्से का सपना देख रही है !
वस्तुत: न तो च्वांगत्से सपने में तितली बनता और न तितली च्वांगत्से । एक अदृश्य शक्ति दो तरह के सपने देखती है, वह रात में तितली बन जाती है, दिन में च्वांगत्से बन जाती है । लेकिन सब सपने टूट जाते हैं । क्या जीवन भी एक सपना नहीं है ? जो टूट जाता है और बिखर जाता है ।यदि वास्तव में ही जिंदगी सपना नहीं, तो क्या है ???
शायद सपना ही हो यह जीवन...
जवाब देंहटाएंसुनते तो आये हैं ...इहलोक से परे है कोई लोक जहाँ हम सबको जाना है...और सबका अंतिम पड़ाव भी वही है....
पाप-पुण्य का हिसाब-किताब वहीँ होगा....चित्रगुप्त जी अपना पोथी निकालेंगे और पूछेंगे हमसे...
अदा जी,
जवाब देंहटाएंशुक्रिया !
जीवन जो सपने की तरह भासता है
वह वास्तविक जीवन कैसे हो सकता है
जो यह सब देख रहा है क्या
वही अदृश्य इस सबका भाग्य विधाता नहीं है ।