गुरुवार, 27 अगस्त 2009

विडम्बना

मां दुखी
पिता परेशान
कि
बेटा छब्बीस का
होने को आया
पर
मिली नहीं नौकरी

बाप परेशान
कि
दे नहीं सकता
घूस में लाखों

मां दुखी
कि
बेटा यूनिवर्सिटी तक
प्रथम श्रेणी में रहकर
भी है बेकार

और बेटा ...
अर्थ से बेअर्थ हुआ
जो कुछ अर्थ पाता
ले जाकर उसको
खरीदता कविता की पुस्तकें
ताकि
अपना खोया संतुलन पा सके
और संयमित हो सके

2 टिप्‍पणियां: